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कांकेर के आमाबेड़ा थाने के गांव बड़े तेवड़ा में 4 दिन से चल रहा हिंसक माहौल अब शांत होने लगा है। दुकानें-बाजार आम दिनों की तरह खुलने लगे हैं। आमाबेड़ा, बड़े तेवड़ा में आबादी वाले इलाकों से फोर्स हटाई जा रही है। हालांकि, यहां और आसपास के गांवों के चर्चों व
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घटना के बाद से ही इलाके में मसीही धर्म के अनुयायी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। बड़े तेवड़ा और आमाबेड़ा में रहने वाले धर्मांतरित लोगों के मकानों पर ताले लटके हैं। 4 दिन पहले गुरुवार को बड़े तेवड़ा में जिस धर्मांतरित सरपंच रजमन सलाम के पिता के शव को दफनाने को लेकर यह विवाद शुरू हुआ, उसके साथ उसका पूरा परिवार अब गांव में नहीं है।
उनके अलावा गांव के कई और लोग भी गायब हैं। वे कहां हैं और क्या उन्हें सुरक्षा के मद्देनजर हटाया गया! यह अब तक साफ नहीं है। आमाबेड़ा में यहां धर्म बदलने वाले 22 परिवार रहते हैं। यहां अलग से एक ईसाई बस्ती ही बस गई है। यहां एक बड़ा चर्च भी है, जहां प्रार्थना के लिए आसपास के 8 गांवों से लोग आते हैं।
ग्रामीणों ने चर्चा में बताया कि आमाबेड़ा में तनाव के ऐसे हालात पहली बार बने हैं। पहले सभी लोग साथ मिलकर रहते थे। धर्म को लेकर कोई विवाद नहीं था। मौजूदा स्थिति यह है कि हिंसा की आशंका से बड़े तेवड़ा, छोटे तेवड़ा, पुफगांव, तुमसनार, बोड़ागांव, गुमझीर, बंडापाल समेत अन्य जगहों के चर्च और प्रार्थना भवनों में सुरक्षा के लिए फोर्स तैनात करनी पड़ी है।
28 साल पहले पुलिस के एक जवान ने लोगों का धर्म बदलवाना शुरू किया
आमाबेड़ा थाने में साल 1998 के आसपास एक पुलिस जवान जेएस उसेंडी की तैनाती हुई। जवान ईसाई धर्म मानता था। नौकरी से समय निकालकर वह धर्म का प्रचार-प्रसार भी करने लगा। जिस घर में किराए पर रहता, वहां रविवार को प्रार्थना होने लगी। आसपास के लोग जुड़ते गए। इनके संपर्क में बड़े तेवड़ा की महिला ललिता सलाम आई, जो बड़े तेवड़ा के सरपंच रजमन सलाम की भाभी है।
उसने धर्म बदल लिया। इसके बाद परिवार के अन्य लोगों ने भी ईसाई धर्म अपनाया। ललिता सलाम 2008 में बड़े तेवड़ा से सरपंच चुनी गई। वर्तमान में ललिता का देवर रजमन सलाम सरपंच है। उसने भी धर्म बदल लिया है। बड़े तेवड़ा में फिलहाल 55 परिवार हैं। इनमें से 3 परिवारों ने मसीही धर्म अपना लिया है। वहीं, बगल के गांव छोटे तेवड़ा में 35 परिवार हैं।
यहां सबसे ज्यादा 15 ने धर्म परिवर्तन किया है। विवाद के बाद गांव वाले कुछ बोलना नहीं चाहते। नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण ने कहा कि धर्म बदलने वाले लोग गांव के देवी-देवता, किसी रीति-रिवाज को नहीं मानते। इन्हें गांव के बुजुर्ग और प्रमुख लंबे समय से समझाइश देते रहे हैं कि अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों को मानो, लेकिन वे नहीं मान रहे। मान जाते, तो आज ऐसा विवाद नहीं होता।
लाश कहां भेजी, पता नहीं इसे लेकर भी कई अफवाहें सरपंच रजमन सलाम के पिता चमरा राम सलाम के शव को दफनाने से विवाद की शुरुआत हुई। 18 दिसंबर को प्रशासन ने शव कब्र से निकालकर गांव से बाहर भेज दिया। शव कहां भेजा गया है, यह जानकारी गोपनीय रखी गई है। शनिवार दोपहर को सोशल मीडिया पर अफवाह फैली कि चारामा के तेलगुड़ा में उक्त शव का अंतिम संस्कार किया गया है। वहां के ग्रामीण चारामा थाने पहुंचे थे। बाद में पूछताछ करने पर पता चला कि वहां रेत उत्खनन करने के लिए पूजा की गई है।
कलेक्टर कांकेर नीलेश महादेव क्षीरसागर ने कहा- बड़े तेवड़ा में बिगड़े हालात अब नियंत्रण में हैं। पुलिस-प्रशासन ने समन्वय से काम किया, जिससे जल्दी वहां शांति बहाल कर ली गई है
इधर, प्रदेश में विवाद और भी हैं… बस्तर: 4 ब्लॉक, जहां दफनाने पर तनाव जगदलपुर| जिले में दो साल में धर्मांतरित लोगों के शव दफनाने से जुड़े 20 से ज्यादा मामले सामने आए। आदिवासी रीति-रिवाज मानने वाले कहते हैं कि गांव के कब्रिस्तान उनके अपनों की अंत्येष्टि के लिए हैं। वहीं ईसाई भी वहां दफन का अधिकार चाहते हैं। कई बार विवाद में भीड़ मारपीट, पुलिस पर हमले कर चुकी है।
कटघोरा: प्रार्थना सभा पर लगातार विवाद कोरबा| कटघोरा में तहसीलभाठा वार्ड के बजरंग जायसवाल मसीही धर्म अपनाकर पास्टर बन चुके हैं। लंबे समय से घर में ही प्रार्थना सभा लगाते रहे हैं। स्थानीय लोग भी तभी से विरोध कर रहे थे। पुलिस ने बजरंग जायसवाल को जेल भेजा। छूटने पर रविवार को उसने कटघोरा के आउटर सुतर्रा गांव में प्रार्थना सभा लगाई। हिंदू संगठन ने धर्मांतरण का आरोप लगाया।
जशपुर : चर्चों का विवाद कोर्ट पहुंचा जशपुरनगर| भू राजस्व की धारा 170-ख में आदिवासी की भूमि को गैर आदिवासी से वापस दिलाने का प्रावधान है। जिले के कई चर्च इसके निशाने पर हैं। पत्थलगांव में चर्च की दीवार तोड़ने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा। जनजाति सुरक्षा मंच की मांग है कि धर्म बदल चुके आदिवासियों को एसटी की सूची से बाहर करें।
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