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Home » Chhattisgarh weather Update| Rain Cold Alert Raipur Durg Bastar Surguja Mainpat | वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से छत्तीसगढ़ में बारिश की चेतावनी: दो दिनों तक हो सकती है बूंदाबांदी, कोहरा छाएगा, 48 घंटे बाद फिर बढ़ेगी ठंड – Chhattisgarh News
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Chhattisgarh weather Update| Rain Cold Alert Raipur Durg Bastar Surguja Mainpat | वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से छत्तीसगढ़ में बारिश की चेतावनी: दो दिनों तक हो सकती है बूंदाबांदी, कोहरा छाएगा, 48 घंटे बाद फिर बढ़ेगी ठंड – Chhattisgarh News

By adminJanuary 2, 2026No Comments8 Mins Read
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पेंड्रा में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। सुबह-शाम के वक्त अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड के बीच एक बार फिर मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। उत्तर पाकिस्तान और पंजाब के ऊपर बने वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से प्रदेश के एक-दो जगहों पर बूंदाबांदी होने की संभावना है। यह बारिश का सिलसिला अगले दो दिनों तक जारी रह

.

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में प्रदेश के न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इसके बाद आने वाले अगले 3 दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे ठंड का असर फिर से बढ़ जाएगा।

पिछले 24 घंटों के दौरान दुर्ग संभाग के एक-दो क्षेत्रों में शीतलहर (Cold Wave) का असर देखा गया। इस दौरान प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे अधिक तापमान दुर्ग में 29.8 डिग्री सेल्सियस।

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ठंड की ये तस्वीरें देखिए…

मैनपाट में पौधों में ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई हैं।

मैनपाट में पौधों में ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई हैं।

सरगुजा संभाग में भी खुले मैदान में घास पर लगी ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गईं।

सरगुजा संभाग में भी खुले मैदान में घास पर लगी ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गईं।

मैनपाट में सुबह ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई।

मैनपाट में सुबह ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई।

सरगुजा के पाट से लेकर मैदानी इलाकों में भी जमकर पाले पड़े।

सरगुजा के पाट से लेकर मैदानी इलाकों में भी जमकर पाले पड़े।

बच्चों पर पड़ रहा ठंड का असर

कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है।

नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है।

NICU और SNCU तक पहुंच रहे मामले

डॉक्टरों के अनुसार, पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने पर बच्चों को एनआईसीयू (NICU) और एसएनसीयू (SNCU) में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाना या तापमान सामान्य से कम हो जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है।

सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। 2 दिन पहले अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा था।

सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। 2 दिन पहले अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा था।

OPD में मरीजों की भीड़

ठंड के चलते अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में 600 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। रोजाना 2000 से अधिक मरीजों का इलाज ओपीडी में किया जा रहा है।

GPM जिले में मध्यप्रदेश बॉर्डर से सटे धर्मपानी की पहाड़ी का नजारा।

GPM जिले में मध्यप्रदेश बॉर्डर से सटे धर्मपानी की पहाड़ी का नजारा।

पेंड्रा में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं।

पेंड्रा में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं।

क्या है हाइपोथर्मिया?

हाइपोथर्मिया एक लाइफ थ्रेटनिंग इमरजेंसी स्थिति है। इसमें शरीर का सामान्य तापमान 98.6 फॉरेनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) से नीचे चला जाता है। तापमान गिरने पर शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता और धीरे-धीरे उसके अहम अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।

पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर हवा या पानी के संपर्क में आकर तेजी से अपनी गर्मी खो देता है। शरीर की लगभग 90 फीसदी गर्मी त्वचा और सांस के जरिए बाहर निकलती है। ठंडी हवा या नमी के संपर्क में आने पर यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है।

अगर कोई व्यक्ति ठंडे पानी में है, तो उसका शरीर हवा की तुलना में 25 गुना तेजी से अपनी गर्मी खोता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

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रायपुर में नगर निगम ने कई जगहों पर अलाव का इंतजाम किया

रायपुर में शीतलहर का असर बढ़ते ही नगर निगम ने आम लोगों को राहत देने के लिए शहर में अलाव जलाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। निगम ने 12 से अधिक लोकेशन पर रातभर अलाव जलवाने के निर्देश दिए हैं, ताकि बेघर, राहगीरों और आम नागरिकों को ठंड से तुरंत राहत मिल सके।

रायपुर नगर निगम की मेयर मीनल चौबे और कमिश्नर विश्वदीप के निर्देशों के बाद सभी जोन कमिश्नरों और जोन हेल्थ अधिकारियों से रात में फील्ड में रहने और अलाव के इंतजाम की निगरानी करने को कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने भी जारी की एडवाइजरी

स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि शीतलहर के दौरान, केवल आवश्यकता होने पर ही यात्रा करें और बाहर निकलते समय पूरी तरह गर्म कपड़े पहनें।

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मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है।

वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े।

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डॉक्टर बोले- सतर्क रहना जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से तापमान बदल रहा है, बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि…

  • शाम के बाद घर और आसपास मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले कॉइल/लिक्विड का उपयोग करें।
  • स्लीपिंग नेट (Insecticide Treated Net – ITN) या लॉन्ग लास्टिंग मच्छरदानी (LLIN) का उपयोग रात में जरूर करें।
  • घर के दरवाजे-खिड़कियों पर जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सके

पानी जमा न होने दें

  • कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी, बर्तन आदि में पानी जमा न रहने दें।
  • सप्ताह में कम से कम एक बार इन्हें साफ और सूखा करें।
  • नाली व ड्रेनेज सिस्टम खुला और साफ रखें।

शरीर को ढककर रखें

  • खासकर शाम के समय पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें।
  • बच्चों को भी हल्के लेकिन ढकने वाले कपड़े पहनाएं।

समय पर जांच और इलाज कराएं

  • यदि बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं।
  • मलेरिया फैलने का आधार
  • तापमान 33-39°C (दिन में)
  • तापमान 14-19°C (रात में)

ऐसा तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल होता है। छत्तीसगढ़ में तापमान अभी इसी तरह का हो रखा है। यानी छत्तीसगढ़ में मलेरिया फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। अगले आठ दिनों में मलेरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण/जंगल क्षेत्रों में।

2 तरह के मलेरिया का खतरा

  • प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (गंभीर प्रकार का मलेरिया)
  • प्लास्मोडियम विवैक्स (सामान्य लेकिन बार-बार लौटने वाला मलेरिया) छत्तीसगढ़ में 11 नवंबर तक प्लास्मोडियम विवैक्स के बढ़ने का ही खतरा ज्यादा है। ऐसे में अपने आस-पास के इलाके में पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का उपयोग करें। फुल स्लीव के कपड़े पहनें। बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत जांच कराएं।

इन राज्यों में भी जोखिम

  • पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम आदि)
  • गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा, नागालैंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक
  • उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और छत्तीसगढ़ के कुछ जिले

सर्दियों में इम्यूनिटी मजबूत करें

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गर्म पानी से भाप लेना फायदेमंद

अगर बंद नाक की समस्या है तो गर्म पानी से भाप लेना बेहद फायदेमंद है। भाप नाक के जरिए हमारे शरीर में जाकर गर्मी पैदा करती है। नाक में जमा म्यूकस भाप की गर्मी से ढीला हो जाता है, जिससे बंद नाक की समस्या दूर हो सकती है।

इसके लिए एक बाउल में गर्म पानी लें। फिर सिर को एक कॉटन टॉवेल से ओढ़ लें। इसके बाद बर्तन का ढक्कन हटाकर 5 से 10 मिनट तक भाप लें।

गले में खराश होने पर करें नमक-पानी के गरारे

आमतौर पर गले में खराश वायरस के कारण होती है। नमक-पानी के गरारे से इसमें राहत मिलती है। अगर सर्दी-खांसी ज्यादा है तो नमक-पानी में तुलसी की कुछ पत्तियां भी मिला सकते हैं।

तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी में काफी आराम पहुंचाते हैं। इसके लिए कम-से-कम एक कप गर्म पानी में एक चौथाई चम्मच नमक घोलकर गरारे कर सकते हैं।

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विटामिन C रिच डाइट लें

विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट्स का काम करती है, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है। विटामिन C की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसके लिए सर्दियों में विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे संतरा, नींबू, आंवला को अपनी डाइट में शामिल करें। इससे न सिर्फ इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि वायरल इन्फेक्शन का खतरा भी कम होता है।

अदरक-तुलसी की चाय बेहद फायदेमंद

अदरक और तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार हैं। इसकी चाय पीने से वायरल इन्फेक्शन से बच सकते हैं।

इसके अलावा तुलसी और अदरक का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। यह शरीर में जमे कफ को बाहर निकलता है। साथ ही सर्दी-ज़ुकाम, खांसी और गले की खराश में आराम दिलाता है।

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