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Home » Chhattisgarh Weather Update| Cold Wave Surguja Mainpath Ambikapur Pendra | उत्तरी-मध्य छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिन शीतलहर की चेतावनी: दुर्ग में न्यूनतम तापमान 10°C, सुकमा-दंतेवाड़ा में मलेरिया का खतरा, बलौदाबाजार-पेंड्रा में अलाव का सहारा – Chhattisgarh News
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Chhattisgarh Weather Update| Cold Wave Surguja Mainpath Ambikapur Pendra | उत्तरी-मध्य छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिन शीतलहर की चेतावनी: दुर्ग में न्यूनतम तापमान 10°C, सुकमा-दंतेवाड़ा में मलेरिया का खतरा, बलौदाबाजार-पेंड्रा में अलाव का सहारा – Chhattisgarh News

By adminNovember 14, 2025No Comments7 Mins Read
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सर्द हवाओं के बीच पेंड्रा की सुबह, यहां कड़ाके की ठंड के बीच रोजमर्रा के काम के लिए आना-जाना करते हुए लोग।

छत्तीसगढ़ में अगले चार दिनों तक उत्तर और मध्य क्षेत्रों में शीतलहर चलने की संभावना है। बाकी जिलों में तापमान में विशेष बदलाव नहीं होगा, हालांकि इसके बाद तापमान में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है।

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मौसम विभाग के अनुसार 14 से 20 नवंबर 2025 के बीच सुकमा और दंतेवाड़ा में मलेरिया फैलने का खतरा अधिक रहेगा। प्रदेश में ठंडी हवाओं के चलते कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

बलौदाबाजार, पेंड्रा और अंबिकापुर में सुबह-शाम लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की कमी से लोगों को दिक्कत हो रही है।

मैदानी इलाकों में दुर्ग सबसे ठंडा शहर बना हुआ है, जहां रात का तापमान 10°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 7 डिग्री कम है। रायपुर में नवंबर महीने में 9 साल में दूसरी बार रात का तापमान 13°C तक पहुंचा है।

पिछले 24 घंटों में प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 30.6°C दुर्ग में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 7.4°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया।

पहले ये तस्वीर देखिए

पेंड्रा में हल्की धुंध के बीच सूरज निकला हुआ है। मौसम साफ होने के बाद यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

पेंड्रा में हल्की धुंध के बीच सूरज निकला हुआ है। मौसम साफ होने के बाद यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

बलौदाबाजार में सुबह शाम के वक्त अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

बलौदाबाजार में सुबह शाम के वक्त अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

मैनपाट में पिछले दिनों घास पर ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई थी।

मैनपाट में पिछले दिनों घास पर ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई थी।

पेंड्रा के गार्डन में कड़ाके की ठंड के बीच योगासन करते नजर आए लोग।

पेंड्रा के गार्डन में कड़ाके की ठंड के बीच योगासन करते नजर आए लोग।

पुेंड्रा इलाके के गांवों और कस्बों में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं।

पुेंड्रा इलाके के गांवों और कस्बों में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं।

नवंबर महीने का मौसम रिकॉर्ड: 90 साल पहले पड़ी थी सबसे तेज गर्मी

नवंबर महीना छत्तीसगढ़ में आमतौर पर ठंड की शुरुआत का समय होता है, लेकिन मौसम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि कभी यह महीना कड़कड़ाती ठंड लेकर आया तो कभी तेज गर्मी और बारिश का गवाह भी रहा।

मौसम विज्ञान केंद्र के पुराने आंकड़ों के अनुसार 2 नवंबर 1935 को अब तक का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 35.6°C दर्ज किया गया था। वहीं, 22 नवंबर 1883 को सबसे कम न्यूनतम तापमान 8.3°C दर्ज हुआ था जो अब तक नवंबर माह की सबसे ठंडी रात मानी जाती है।

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बारिश के रिकॉर्ड भी बने

नवंबर में सबसे ज्यादा बारिश 1924 में हुई थी, जब पूरे महीने में 138.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इतना ही नहीं, 2 नवंबर 1930 को 24 घंटे के भीतर 70.4 मिमी बारिश हुई थी जो इस महीने के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा एकदिवसीय वर्षा रिकॉर्ड है।

मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार, नवंबर में मौसम सामान्यतः शुष्क रहता है, पर कभी-कभी बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाले निम्न दबाव के असर से हल्की बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

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आमतौर पर इस तरह बीतता है नवंबर का महीना

नवंबर का महीना आमतौर पर छत्तीसगढ़ (और आस-पास के इलाकों) में खुले और साफ मौसम वाला होता है। कभी-कभी आसमान थोड़ा बादलों से ढका भी रहता है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ने लगती है, वैसे-वैसे दिन का तापमान कम होने लगता है यानी दिन हल्के ठंडे हो जाते हैं।

इस समय हवाएं आमतौर पर धीमी और हल्की चलती हैं। अगर इस महीने बारिश होती भी है, तो वह सामान्यतः किसी चक्रवात या निम्न दबाव (Low Pressure) के कारण होती है जो अधिकतर बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनकर इस क्षेत्र की ओर आते हैं।

आम तौर पर नवंबर का महीना तूफानों और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं से लगभग मुक्त रहता है। इसलिए यह शांत और स्थिर मौसम का महीना माना जाता है।

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मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है।

वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े।

किसानों और शहरों के लिए संकेत

  • रबी फसलों के लिए मौसम अनुकूल
  • सुबह हल्की धुंध और कोहरा रह सकता है
  • सुबह-शाम गर्म कपड़े जरूरी
  • रात के समय तापमान में गिरावट से ठंड बढ़ेगी

डॉक्टर बोले- सतर्क रहना जरूरी, ये मौसम बीमारी ला सकता है

डॉ विकास अग्रवाल ने (एमडी, मेडिसिन) बताया कि जिस तरह से तापमान बदल रहा है, बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि…

  • शाम के बाद घर और आसपास मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले कॉइल/लिक्विड का उपयोग करें।
  • स्लीपिंग नेट (Insecticide Treated Net – ITN) या लॉन्ग लास्टिंग मच्छरदानी (LLIN) का उपयोग रात में जरूर करें।
  • घर के दरवाजे-खिड़कियों पर जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।

पानी जमा न होने दें

  • कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी, बर्तन आदि में पानी जमा न रहने दें।
  • सप्ताह में कम से कम एक बार इन्हें साफ और सूखा करें।
  • नाली व ड्रेनेज सिस्टम खुला और साफ रखें।

शरीर को ढककर रखें

  • खासकर शाम के समय पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें।
  • बच्चों को भी हल्के लेकिन ढकने वाले कपड़े पहनाएं।

समय पर जांच और इलाज कराएं

  • यदि बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं।
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मलेरिया फैलने का आधार

  • तापमान 33-39°C (दिन में)
  • तापमान 14-19°C (रात में)

ऐसा तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल होता है। छत्तीसगढ़ में तापमान अभी इसी तरह का हो रखा है। यानी छत्तीसगढ़ में मलेरिया फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। अगले आठ दिनों में मलेरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण/जंगल क्षेत्रों में।

2 तरह के मलेरिया का खतरा

  • प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (गंभीर प्रकार का मलेरिया)
  • प्लास्मोडियम विवैक्स (सामान्य लेकिन बार-बार लौटने वाला मलेरिया) छत्तीसगढ़ में 11 नवंबर तक प्लास्मोडियम विवैक्स के बढ़ने का ही खतरा ज्यादा है। ऐसे में अपने आस-पास के इलाके में पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का उपयोग करें। फुल स्लीव के कपड़े पहनें। बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत जांच कराएं।

इन राज्यों में भी जोखिम

  • पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम आदि)
  • गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा, नागालैंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक
  • उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और छत्तीसगढ़ के कुछ जिले

सर्दियों में इम्यूनिटी मजबूत करें

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गर्म पानी से भाप लेना फायदेमंद

अगर बंद नाक की समस्या है तो गर्म पानी से भाप लेना बेहद फायदेमंद है। भाप नाक के जरिए हमारे शरीर में जाकर गर्मी पैदा करती है। नाक में जमा म्यूकस भाप की गर्मी से ढीला हो जाता है, जिससे बंद नाक की समस्या दूर हो सकती है।

इसके लिए एक बाउल में गर्म पानी लें। फिर सिर को एक कॉटन टॉवेल से ओढ़ लें। इसके बाद बर्तन का ढक्कन हटाकर 5 से 10 मिनट तक भाप लें।

गले में खराश होने पर करें नमक-पानी के गरारे

आमतौर पर गले में खराश वायरस के कारण होती है। नमक-पानी के गरारे से इसमें राहत मिलती है। अगर सर्दी-खांसी ज्यादा है तो नमक-पानी में तुलसी की कुछ पत्तियां भी मिला सकते हैं।

तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी में काफी आराम पहुंचाते हैं। इसके लिए कम-से-कम एक कप गर्म पानी में एक चौथाई चम्मच नमक घोलकर गरारे कर सकते हैं।

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विटामिन C रिच डाइट लें

विटामिन C एंटीऑक्सिडेंट्स का काम करती है, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है। विटामिन C की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसके लिए सर्दियों में विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे संतरा, नींबू, आंवला को अपनी डाइट में शामिल करें। इससे न सिर्फ इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि वायरल इन्फेक्शन का खतरा भी कम होता है।

अदरक-तुलसी की चाय बेहद फायदेमंद

अदरक और तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल व एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार हैं। इसकी चाय पीने से वायरल इन्फेक्शन से बच सकते हैं।

इसके अलावा तुलसी और अदरक का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। यह शरीर में जमे कफ को बाहर निकलता है। साथ ही सर्दी-ज़ुकाम, खांसी और गले की खराश में आराम दिलाता है।

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