गरियाबंद (छत्तीसगढ़)10 मिनट पहले
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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 265 एकड़ वन भूमि पर पेड़ों की अवैध कटाई और अतिक्रमण के आरोपों का सामना कर रहे 166 आरोपियों ने गुरुवार को अपना लिखित जवाब पेश किया।उपनिदेशक कार्यालय में जमा किए गए जवाब में सभी आरोपियों ने खुद को प्रकृति प्रेमी बताते हुए लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
उनका कहना है कि वे अपने पूर्वजों की जमीन पर लंबे समय से खेती कर रहे हैं। आरोपियों का दावा है कि अभयारण्य क्षेत्र में किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि गृह ग्राम जैतपुरी से लगा कक्ष क्रमांक 324 उनकी निजी भूमि की सीमा में आता है, जहां हमेशा सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं।
ऐसी स्थिति में पेड़ों की कटाई या सफाई करना संभव नहीं है। सभी आरोपियों ने अवैध कब्जे के आरोपों को पूरी तरह अस्वीकार किया।
देखिए पहले ये तस्वीरें-

पेड़ कटाई और अतिक्रमण के 166 आरोपी उपनिदेशक कार्यालय पहुंचे।

सभी आरोपियों ने खुद को प्रकृति प्रेमी बताते हुए लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

कब्जे का खुलासा होने के बाद वन विभाग ने ड्रोन सर्वे कराया।
डिजिटल सबूत से कार्रवाई का दावा
उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि कार्रवाई डिजिटल सबूतों के आधार पर की गई है। सैटेलाइट इमेजरी से यह सामने आया कि 2005 के बाद 2010 से 2022 के बीच बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई। 2011 तक 45 हेक्टेयर क्षेत्र में कटाई हुई थी, जो अगले दस सालों में बढ़कर 106 हेक्टेयर हो गई।
टीम ने मौके पर पेड़ों के ठूंठ और जले अवशेषों का पंचनामा तैयार कर सबूत जुटाए हैं। मामले में वाइल्डलाइफ एक्ट के तहत केस केस किया गया है। उपनिदेशक ने कहा कि सभी साक्ष्य न्यायालय में पेश होंगे, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

2008 के बाद हुए कब्जों का खुलासा
उदंती-सीतानदी अभयारण्य में साल 2008 के बाद हुए अवैध कब्जों का खुलासा साल 2022 से शुरू हुआ, जब वरुण जैन ने उपनिदेशक के रूप में पदभार संभाला। आईटी एक्सपर्ट वरुण जैन ने 2023 में गूगल अर्थ की मदद से अभयारण्य का रिमोट सेंसिंग पोर्टल तैयार किया। इस पोर्टल में 20 साल से अधिक पुराने सैटेलाइट इमेज हैं।
सैटेलाइट इमेज से खुली अवैध कटाई और कब्जे की परतें
2006, 2008 और 2010 में ली गई सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से अवैध पेड़ कटाई और अतिक्रमण के मामलों का लगातार खुलासा होता गया।

ISRO की सैटेलाइट इमेज, साल 2012 और साल 2026 की तस्वीरें।
कई गांवों में चला बेदखली अभियान
हालिया कार्रवाई से पहले घोरागांव, सोरमाल, बुढ़गेलटप्पा, बनवापारा, गरीबा, कोकड़ी, गोना, कांडसर, फरसरा, पीपलखुटा, कारिपानी और करलाझर नागेश क्षेत्रों में कुल 850 हेक्टेयर भूमि पर बेदखली की कार्रवाई की गई।
डिजिटल सबूत बना मजबूत आधार
सभी मामलों में डिजिटल सबूत को आधार बनाकर सख्त कार्रवाई की गई। बेदखली के बाद मुक्त कराई गई भूमि की अनुमानित कीमत 510 करोड़ रुपए आंकी गई है। मुक्त कराई गई जमीन पर योजनाबद्ध तरीके से पौधरोपण किया गया।
साथ ही जल संरक्षण के लिए कंटूर ट्रेंच जैसे संरचनाओं का निर्माण कराया गया।
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छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व में 1 लाख से ज्यादा पेड़ कटने का खुलासा हुआ है।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 1 लाख पेड़ काटे गए। ISRO की सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। यहां पिछले करीब 15 सालों से बड़े पैमाने पर कटाई चल रही थी। पढ़ें पूरी खबर…

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