देशभर में खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और गलत जगह सप्लाई के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। जिस पर छत्तीसगढ़ पांचवें स्थान पर है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में आंकड़े पेश किए है। जिसके अनुसार, 1 अप्रैल से 28 नवंबर 2025 के बीच राज्य में खाद की कालाबाजारी पर 294
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इनमें से 13 विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द किए गए, जबकि 4 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस ने खाद की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कालाबाजारी को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए जमकर हंगामा किया था। विपक्ष ने आरोप लगाया कि, किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है और अवैध तरीके से इसकी जमाखोरी की जा रही है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में भी खाद को लेकर कांग्रेस ने हंगामा किया था।
यूपी सबसे आगे, एमपी टॉप-3 में
केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में खाद की कालाबाजारी, खराब क्वालिटी, गलत जगहों पर सप्लाई जैसे मामले में 197 एफआईआर दर्ज की गईं, जो देश में सबसे ज्यादा है। राजस्थान 103 एफआईआर के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं, 91 एफआईआर दर्ज कर मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है।

खाद जमाखोरी की शिकायत पर राजनांदगांव जिले में जांच करते हुए कृषि अधिकारी। (फाइल फोटो)
खाद के मामले में राज्यों की स्थिति
- कालाबाजारी में हर मोर्चे पर उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे।
- जमाखोरी में नोटिस को लेकर कर्नाटक, लाइसेंस कार्रवाई उत्तर प्रदेश और FIR राजस्थान में सबसे ज्यादा।
- घटिया गुणवत्ता में महाराष्ट्र सबसे बड़ा एक्शन स्टेट।
- गलत सप्लाई/विपथन में नोटिस ओडिशा, लाइसेंस कार्रवाई मध्य प्रदेश और FIR राजस्थान में सबसे ज्यादा।
- कुल एक्शन के आधार पर उत्तर प्रदेश पहले, राजस्थान दूसरे , मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर, कर्नाटक चौथे और छत्तीसगढ़ पांचवे स्थान पर है।
कालाबाजारी में यूपी देश में अव्वल
खाद की कालाबाजारी में यूपी देश में सबसे आगे है। यूपी में खाद की ब्लैक मार्केटिंग के मामले में 2043 नोटिस जारी किए गए। यूपी में 2742 लाइसेंस रद्द या सस्पेंड किए गए। कालाबाजारी के मामले में देश में सबसे ज्यादा 165 एफआईआर भी यूपी में ही दर्ज की गई है।

जमाखोरी करने में राजस्थान सबसे आगे
खाद की जमाखोरी के मामलों में सबसे ज्यादा 30 एफआईआर राजस्थान में दर्ज की गई है। दूसरे नंबर पर यूपी में 8, तीसरे नंबर पर हरियाणा में 4 एफआईआर दर्ज की गई है। एमपी में खाद की जमाखोरी के मामले में एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है।

खाद की घटिया क्वॉलिटी के मामलों में महाराष्ट्र सबसे आगे
खाद की घटिया क्वॉलिटी के मामलों में सबसे ज्यादा नोटिस जारी करने वाले राज्यों में महाराष्ट्र पहले नंबर पर और एमपी तीसरे नंबर पर है। महाराष्ट्र ने खाद की खराब गुणवत्ता के मामलों में 1139 नोटिस जारी किए हैं। दूसरे नंबर पर ओडिशा ने 107 और तीसरे नंबर पर एमपी में 44 नोटिस जारी किए गए हैं।

गलत सप्लाई करने के मामले में एमपी पहले नंबर पर
खाद की गलत जगह सप्लाई करने के मामले में एमपी देश में पहले नंबर पर है। ऐसे मामलों में एमपी में 631 नोटिस जारी किए गए और 160 खाद विक्रेताओं के लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने की कार्रवाई हुई है। एमपी में इस तरह के मामलों में 15 एफआईआर दर्ज की गई।
छत्तीसगढ़ के इन 2 केस से खाद संकट स्थिति को समझिए
केस-1
सक्ती में AAP का प्रदर्शन
2 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में खाद की किल्लत और कालाबाजारी के विरोध में AAP ने प्रदेशव्यापी आंदोलन किया था। सक्ती जिले के कचहरी चौक पर पार्टी कार्यकर्ताओं और किसानों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।
कलेक्टर को आवेदन देकर समस्या समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। AAP के आंदोलन पर कृषि विभाग की टीम ने खाद विक्रेताओं का अचानक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई में तीन दुकानों में अनियमितताएं पाई गईं। ऐसे में दुकान संचालकों को नोटिस जारी कर 7 दिनों में जवाब मांगा।

सक्ती में प्रदर्शन करते हुए AAP के पदाधिकारी-कार्यकर्ता। (फाइल)
केस-2
रायगढ़ में किसान सड़क पर उतरे
4 सितंबर 2025 को रायगढ़ जिले में किसानों ने खाद की मांग को लेकर विरोध जताया था। खरसिया कांग्रेस के पदाधिकारियों ने समर्थन किया। ऐसे में कांग्रेस कार्यालय से रैली निकालकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही 5 दिन के भीतर खाद की किल्लत दूर करने की मांग की। कांग्रेस ने प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन किया और उसके बाद किसानों को खाद संबंधी राहत मिले।

रायगढ़ में प्रदर्शन करते हुए किसान और कांग्रेस के पदाधिकारी-कार्यकर्ता। (फाइल)
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