CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) अब जशपुर पुलिस के प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। गुरुवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिले के अलग-अलग थाना-चौकी से आए पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों ने भाग लिया।
.
दरअसल, इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी राष्ट्रीय मुख्यालय नई दिल्ली और परिवार स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार पूरे देश में 13 से 17 अक्टूबर 2025 तक सीपीआर जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। जिसके तहत जशपुर एसपी दफ्तर में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिला रेडक्रॉस अधिकारी, मास्टर ट्रेनर रूपेश कुमार पाणीग्राही और सहायक ट्रेनर प्र.आर. वृत्तनारायण भगत ने मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को सीपीआर देने की विधि के बारे बताया। उन्होंने आपात स्थिति में सीपीआर के महत्व और उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि सीपीआर देने की विधि हर व्यक्ति को सीखनी चाहिए। क्योंकि यह किसी की जान बचाने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है। एक प्रशिक्षित व्यक्ति कभी भी किसी की जान बचाने वाला बन सकता है। यह प्रशिक्षण हमें केवल तकनीक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी सिखाता है।

प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया
सत्र के दौरान दोनों प्रशिक्षकों ने प्रायोगिक प्रदर्शन भी किया, जिसमें पुलिस कर्मियों ने स्वयं अभ्यास कर इस तकनीक को आत्मसात किया। मास्टर ट्रेनर रूपेश कुमार पाणीग्राही ने बताया कि किसी व्यक्ति के सांस या हृदय की गति रुकने पर तुरंत सीपीआर देने से उसके जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सीपीआर की प्रक्रिया को विस्तार से बताया
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआर देने की विधि सरल है, लेकिन इसे सही तरीके से करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सीपीआर की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। इसमें सबसे पहले व्यक्ति की सांस और नब्ज की जांच की जाती है। यदि सांस नहीं चल रही हो, तो व्यक्ति को समतल सतह पर लिटाकर उसके मुंह में मौजूद किसी भी पदार्थ को साफ किया जाता है।
इसके बाद छाती के बीचों-बीच दोनों हाथ रखकर 100 से 120 बार प्रति मिनट की गति से दबाव दिया जाता है। प्रत्येक 30 दबाव के बाद दो बार मुंह से सांस (रेस्क्यू ब्रेथ) दी जाती है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रखनी चाहिए जब तक व्यक्ति में सांस न लौट आए या चिकित्सकीय मदद न मिल जाए।
<
