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हरदीबाजार में CHC भवन तोड़े जाने के विरोध में बीजेपी विधायक के नेतृत्व में ग्रामीणों ने SECL दीपका GM कार्यालय किया तालाबंद, पुलिस से हल्की झड़प

छत्तीसगढ़ के कोरबा के हरदीबाजार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भवन तोड़े जाने की कार्रवाई के विरोध में शनिवार को कटघोरा के बीजेपी विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण दीपका स्थित SECL के मुख्य महाप्रबंधक (GM) कार्यालय पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और कार्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। इसके बाद वे कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।

ग्रामीण 100 प्रतिशत मुआवजा, नौकरी, बसाहट और स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने साफ कहा कि उनकी मुख्य मांगों में यही शामिल हैं और इन मांगों पर समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।

प्रदर्शन के दौरान दीपका GM अशोक कुमार ग्रामीणों के बीच पहुंचे और उन्हें समझाने की कोशिश की। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति शांत करने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीणों के प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और ग्रामीण SECL कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई।

दरअसल, कोरबा के साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका विस्तार परियोजना को लेकर शुक्रवार तड़के भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हरदीबाजार के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भवन को बुलडोजर से गिरा दिया। इसके अलावा कार्रवाई के दौरान छात्रावास, आंगनबाड़ी और पटवारी कार्यालय को भी ध्वस्त कर दिया गया।

बतादें कि शुक्रवार सुबह प्रशासन की टीम जेसीबी और बुलडोजर लेकर हरदीबाजार पहुंची। इसके बाद जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई के तहत सरकारी भवनों को तोड़ा गया। कर्मचारियों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग, पटवारी कार्यालय और आंगनबाड़ी से दस्तावेज और जरूरी सामान बाहर निकालने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। कर्मचारियों के मुताबिक, दवाइयां, दस्तावेज और अन्य सामग्री भवनों के मलबे में दब गई। आंगनबाड़ी केंद्र को भी सामान हटाए जाने से पहले ही तोड़ दिए जाने का आरोप है। वहीं पटवारी कार्यालय का कक्ष भी पूरी तरह खाली नहीं हुआ था, इसके बावजूद भवन ढहा दिया गया।

कार्रवाई के दौरान शुक्रवार सुबह कई मरीज रोज की तरह स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। अस्पताल भवन को तोड़े जाने की कार्रवाई देखकर उन्हें बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी पहले से नहीं थी। अचानक भवन तोड़े जाने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भवनों को हटाने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी और पटवारी कार्यालय जैसी जरूरी सेवाओं के लिए दूसरे भवन की व्यवस्था करने के बाद ही तोड़फोड़ की कार्रवाई होनी चाहिए थी। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मुआवजा, नौकरी, बसाहट और पुनर्वास से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होता, तब तक अस्पताल भवन को नहीं तोड़ा जाना चाहिए था। ग्रामीणों के अनुसार यह अस्पताल आसपास के लोगों के इलाज का मुख्य सहारा था। अस्पताल टूटने के बाद क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के मुआवजा निर्धारण और मुआवजा पत्रक में गड़बड़ी है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीण विस्थापित परिवारों के लिए नई बसाहट और बेहतर पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। साथ ही अधिग्रहण के बदले प्रभावित परिवारों को नियम के अनुसार स्थायी नौकरी देने की मांग भी की जा रही है। करीब 18 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण से प्रभावित परिवार अपने अधिकारों और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

अस्पताल तोड़े जाने और मांगों का समाधान नहीं होने से नाराज हरदीबाजार, सराई सिंगार, रेंकी और आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग दीपका स्थित SECL के मुख्य महाप्रबंधक (GM) कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। इसके बाद वे कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।

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