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ब्रिक्स लीगल फोरम में छत्तीसगढ़ के अधिवक्ताओं ने किया प्रतिनिधित्व, नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया गया

नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में 22 और 23 अगस्त को आयोजित 11वें ब्रिक्स-लीगल फोरम में छत्तीसगढ़ के अधिवक्ता विनय दुबे और आशीष शुक्ला ने प्रतिनिधित्व किया। दो दिवसीय सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय विधि विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य विषय आर्थिक लचीलेपन, नवाचार और स्थिरता के लिए कानून के शासन के ढांचे और संस्थागत क्षमता निर्माण पर केंद्रित था। फोरम में कानून को ऐसा बनाने पर जोर दिया गया, जो बदलती परिस्थितियों के अनुरूप लचीला हो, लेकिन उसकी स्थिरता बनी रहे और उसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे।

अधिवक्ता विनय दुबे ने सम्मेलन की चर्चा साझा करते हुए बताया कि आज के दौर में अलग-अलग देशों की कानूनी व्यवस्थाओं के बीच सहयोग और समन्वय जरूरी है। कानून और संविधान के मूल सिद्धांतों का सम्मान करते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिससे एक देश दूसरे देश की कानूनी प्रणाली के साथ बेहतर तरीके से जुड़ सके।

उन्होंने कहा कि कानून में स्थिरता जरूरी है, लेकिन उसमें परिस्थितियों के अनुसार बदलाव की गुंजाइश भी होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आने वाले ज्वलंत मुद्दों पर देश एक-दूसरे के साथ सहयोग कर सकें, इसके लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करना जरूरी है।

फोरम में मानव अधिकार, आर्बिट्रेशन कानून, कानूनी पेशे और विधि शिक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। विनय दुबे के मुताबिक देशों के बीच कानूनी सहयोग बढ़ने से विधि शिक्षा और कानूनी पेशे के स्तर को भी बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग देशों के कानून विशेषज्ञ एक-दूसरे के अनुभव साझा करें और विधि शिक्षा को उच्च स्तर तक ले जाने के लिए सहयोग करें, यह भी सम्मेलन की महत्वपूर्ण चर्चा रही। कानून का अंतिम उद्देश्य जनहित की रक्षा होना चाहिए और नई कानूनी व्यवस्थाएं बनाते समय इस बात को केंद्र में रखा जाना चाहिए।

सम्मेलन में सीमा पार होने वाले व्यावसायिक विवादों के समाधान के लिए प्रस्तावित ब्रिक्स आर्बिट्रेशन नेटवर्क (ब्रिक्सैन) पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यावसायिक विवादों के समाधान के लिए सहयोग की व्यवस्था विकसित करना है। इसके साथ ही आर्थिक मजबूती, जलवायु वित्त, डिजिटल नियमन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए कानूनी व्यवस्था जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।

फोरम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भी संबोधित किया। मुख्य न्यायाधीश ने सदस्य देशों की अलग-अलग कानूनी परंपराओं को जोड़ने और संस्थाओं के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए ‘न्याय सेतु’ की अवधारणा पर जोर दिया। फोरम में कानून और न्याय व्यवस्था को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए समय पर न्याय मिलने को भी महत्वपूर्ण माना गया।

सम्मेलन में तेजी से बढ़ती तकनीक को देखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल गवर्नेंस के लिए साझा कानूनी मानक तैयार करने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि तकनीक से जुड़े नए क्षेत्रों में अलग-अलग देशों के कानूनों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। फोरम के समापन पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने आपसी कानूनी सहयोग बढ़ाने के लिए नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया।

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