छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष आरएस विश्वकर्मा अपने एक दिवसीय दौरे पर मनेंद्रगढ़ पहुंचे। उन्होंने कलेक्ट्रेट कार्यालय में अधिकारियों-कर्मचारियों की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने पिछड़े वर्ग के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के
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अध्यक्ष ने कहा कि जब तक योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, तब तक सशक्त समाज की कल्पना अधूरी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों को अधिक से अधिक हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया।
अध्यक्ष विश्वकर्मा ने बताया कि आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया गया है। उन्होंने जाति जनगणना के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि देश में इसकी शुरुआत 1932 में हुई थी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलाकर आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

मुख्यमंत्री कौशल विकास कार्यक्रमों का दिया गया ब्योरा
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 95 जातियां अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नगरीय निकायों में 33 प्रतिशत और पंचायतों में 57 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग की है, जो समाज में उनकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।
समीक्षा बैठक के दौरान सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने छात्रवृत्ति, स्वरोजगार ऋण और शैक्षणिक सहायता योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की गई। वहीं, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने राज्य अंत्यावसायी सहकारी निगम के माध्यम से दी जा रही ऋण सहायता और मुख्यमंत्री कौशल विकास कार्यक्रमों का ब्योरा दिया।

रखा जाएगा छात्रावास खोलने का प्रस्ताव
शिक्षा विभाग ने ओबीसी विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, साइकिल वितरण, यूनिफॉर्म, छात्रावास सुविधा और प्रधानमंत्री यशस्वी योजना की प्रगति से अवगत कराया। कौशल विकास विभाग ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को दिए जा रहे प्रशिक्षण की जानकारी दी।
इस दौरे के दौरान, अध्यक्ष विश्वकर्मा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश सरकार के समक्ष पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास खोलने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
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