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बलौदा ब्लाक में शिक्षक शराब के नशे में स्कूल पहुंचा, टेबल के नीचे गिरा, ग्रामीणों में आक्रोश

जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लाक में शिक्षक के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत परसदा के नवीन प्राथमिक शाला संजय नगर में पदस्थ शिक्षक ललित भारद्वाज शनिवार को कथित रूप से शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार उनकी हालत इतनी खराब थी कि वे लड़खड़ाते हुए स्टाफ रूम पहुंचे और कुर्सी पर बैठने के दौरान संतुलन बिगड़ने से टेबल के नीचे गिर गए।

शिक्षक को काफी देर तक इस हालत में पड़ा देखकर बच्चे घबरा गए। वे स्कूल से बाहर निकलकर अपने परिजनों के पास पहुंचे और घटना की जानकारी दी। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चों के परिजन विद्यालय पहुंचे। ग्रामीणों के मुताबिक शिक्षक उस समय भी टेबल के नीचे पड़े थे और उठ नहीं पा रहे थे। लोगों ने उन्हें उठाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

करीब डेढ़ से दो घंटे बाद शिक्षक खुद उठकर जमीन पर बैठ गए और काफी देर तक जोर-जोर से बड़बड़ाते रहे। स्कूल में बच्चों की दर्ज संख्या 22 है। यहां शिक्षक ललित भारद्वाज और प्रधानपाठक अनुसुइया कंवर पदस्थ हैं। शनिवार को प्रधानपाठक स्कूल में मौजूद नहीं थीं। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें बताया गया कि वे संकुल केंद्र पहरिया में प्रशिक्षण में गई थीं।

घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि शिक्षक का कथित रूप से नशे की हालत में विद्यालय पहुंचना न केवल स्कूल के अनुशासन बल्कि बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

बलौदा ब्लाक में शिक्षकों के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। हाल ही में लेवई प्राथमिक शाला की शिक्षिका हीराबाई पोर्ते और नवापारा (ख) मिडिल स्कूल के प्रधानपाठक अरविंद साव को विद्यालय में शराब के नशे में पाए जाने के मामले में निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल समय पर नहीं पहुंचने, नशे की हालत में विद्यालय आने और अन्य अनियमितताओं की शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना है कि विभाग को केवल समाचार प्रकाशित होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय नियमित निरीक्षण और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि नशे की हालत में विद्यालय आने और अन्य अनुशासनहीनता के मामलों में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण का केंद्र है और यहां शिक्षक की ऐसी स्थिति पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। अब नजर शिक्षा विभाग की जांच और कार्रवाई पर है।

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