गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के धुरुवागुडी गांव की खेमेश्वरी तिवारी कभी दहेज प्रताड़ना के चलते ससुराल छोड़ने को मजबूर हुई थीं। आज वही खेमेश्वरी सैकड़ों परिवारों को घर के पास नकद सुविधा उपलब्ध कराकर ‘बैंक वाली दीदी’ के नाम से जानी जा रही हैं।
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गरीब परिवार में जन्मी खेमेश्वरी का विवाह साल 2017 में हुआ था, लेकिन दहेज की मांग पूरी न होने पर उन्हें प्रताड़ना झेलनी पड़ी। मजबूरन वे मायके लौट आईं, जहां माता-पिता, दो छोटी बहनें और एक भाई के साथ रहने लगीं। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।
आजीविका मिशन से जुड़कर बदली जिंदगी
खेमेश्वरी साल 2019 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं। अमलीपदर क्लस्टर की पीआरपी निधि साहू के सहयोग से उन्हें प्रशिक्षण दिया गया और बीसी सेंटर की आईडी के साथ 60 हजार रुपए का ऋण भी मिला। शुरुआती दो वर्ष उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहे।

कोरोना काल में बनीं ग्रामीणों का सहारा
कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान जब बैंकों तक पहुंच मुश्किल हुई, तब खेमेश्वरी ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के हितग्राहियों के लिए बैंक का विकल्प बनकर उभरीं। यहीं से वे ‘बैंक वाली दीदी’ के रूप में पहचानी जाने लगीं।
हर माह 1200 हितग्राहियों को नकद भुगतान
खेमेश्वरी माइक्रो एटीएम के माध्यम से आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट स्कैन कर प्रति माह करीब 1200 हितग्राहियों को 20 से 25 लाख रुपए नकद उपलब्ध कराती हैं। यह भुगतान वृद्धा पेंशन, किसान समृद्धि, जीवन ज्योति, छात्रवृत्ति, तेंदूपत्ता संग्राहक सहित 12 सरकारी योजनाओं से जुड़ा होता है।
सालाना 2 करोड़ रुपए से अधिक का लेनदेन
पिछले दो वित्तीय सालों में खेमेश्वरी ने प्रतिवर्ष लगभग 2 करोड़ रुपए का लेनदेन किया है। इससे उनकी मासिक आय करीब 20 हजार रुपए तक हो जाती है।

घर-घर पहुंचाकर देती हैं बुजुर्गों को राशि
आज भी उनके बीसी सेंटर में रोज भीड़ लगी रहती है। सेंटर तक नहीं आ पाने वाले 40 से अधिक बुजुर्ग और बीमार हितग्राहियों के घर तक जाकर वे खुद राशि निकालकर देती हैं।
जंगल और दुर्गम इलाकों में सेवा
मैनपुर ब्लॉक के बूढ़गेलटप्पा, खोखमा, सारईपानी, सिहारलीटी पंचायत सहित जंगल के भीतर बसे 10 से अधिक गांवों तक उन्हें पहुंचना पड़ता है। बारिश, ठंड और अंगूठा स्कैन न होने जैसी समस्याओं के बावजूद वे लगातार सेवा में जुटी रहती हैं।

जिले और प्रदेश में बनीं मिसाल
बिहान योजना के जिला अधिकारी रमेश वर्मा ने बताया कि जिले में 96 और प्रदेश में 3500 से अधिक बीसी सेंटर हैं, जिनमें सर्वाधिक हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने वाली बीसी सखी खेमेश्वरी हैं। वर्ष 2024 में 1.80 करोड़ और 2025 में 2 करोड़ रुपए का लेनदेन कर उन्होंने प्रदेश की उत्कृष्ट बीसी सखी का खिताब हासिल किया।
प्रशासन ने सराहा योगदान
जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने बताया कि खेमेश्वरी को आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षण, ऋण और लैपटॉप उपलब्ध कराया गया है। आने वाले समय में फिंगर स्कैन की समस्या के समाधान के लिए आई-स्कैन डिवाइस भी दिए जाएंगे। उन्होंने खेमेश्वरी को जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
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