सीएजी का खुलासा:36.68 करोड़ खर्च हुए, फिर भी पानी नहीं, अफसरों ने ठेकेदार का 5.18 करोड़ रुपए का जुर्माना दबाया — जानिए क्या हुआ

जिले में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपए का बड़ा वित्तीय घोटाला व प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है। भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की वर्ष 2026 के प्रतिवेदन संख्या- 7 (स्थानीय निकाय) की जांच में खुलासा हुआ है कि जिले के निकायों में विभागीय अफसरों, निजी ठेकेदार के कारण जल आपूर्ति की योजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हुई है। जांजगीर-नैला व अकलतरा नगर पालिका में 36.68 करोड़ रुपए खर्च हुए, लेकिन लोग आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पूर्व के अफसरों ने न केवल नियम-कायदों को ताक पर रखकर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया, बल्कि 5.18 करोड़ की अनिवार्य दंडात्मक वसूली को भी पूरी तरह दबा दिया। जांजगीर क्षेत्र में पानी की टंकियों का निर्माण कराया गया। वार्डों में पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन लोगों को नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है। प्रोजेक्ट के अधूरे कामों को पूरा करने, छूटे हुए हिस्सों में पाइपलाइन जोड़ने, टंकियों के संचालन को सुचारू बनाने के लिए अतिरिक्त फंड जारी किया गया है। अकलतरा शहर में जल वितरण पाइपलाइन योजना की स्थिति और भी खराब है। प्रोजेक्ट की स्वीकृत राशि 27.59 करोड़ में से 12.33 करोड़ रुपए का भुगतान हो चुका है, लेकिन केवल 55.11% ही काम हो पाया। इधर शहर के वार्डों में पेयजल आपूर्ति सुचारू करने के लिए शासन की ओर से दोबारा राशि जारी की गई है। इसके तहत टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ठेकेदार को निर्माण का काम सौंपा गया, लेकिन काम की गति बेहद धीमी बनी हुई है। तुलसी भवन के पास पानी की टंकी के ऊपरी हिस्से का निर्माण कार्य अब भी अधूरा है। वहीं कई इलाकों में लंबे समय से पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है, जो महीनों बीतने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। सुरक्षा जमा जब्त करने में नाकामी दोनों निकायों ने ठेकेदार के चल देयकों से 1.67 करोड़ रुपए (जांजगीर-नैला से 1.08 करोड़ और अकलतरा से 0.59 करोड़) सुरक्षा जमा के रूप में रोक रखे थे। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नियमानुसार इस पूरी 1.67 करोड़ की सुरक्षा राशि को तुरंत राजसात कर लिया जाना चाहिए था। शेष 3.51 करोड़ की अतिरिक्त राशि की वसूली ठेकेदार से की जानी चाहिए थी। लेकिन अफसरों ने ठेकेदार के खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग या राशि ज़ब्ती की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जानिए क्या है पूरा मामला, कब शुरू हुआ प्रोजेक्ट और किसे मिला ठेका नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने अक्टूबर 2017 में जिले के दो प्रमुख निकायों नगरपालिका जांजगीर-नैला व अकलतरा में जल वितरण पाइपलाइन, जल आपूर्ति अवसंरचना के निर्माण कार्यों के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी थी। जांजगीर-नैला प्रोजेक्ट की लागत 34.55 करोड़ रुपए तय की गई। इसके लिए दर अनुबंधों को अक्टूबर 2018 में मंजूरी देकर कार्य का ठेका दिया गया, जिसकी निर्धारित पूर्णता अवधि 24 माह (अक्टूबर 2020 तक) रखी गई थी। अकलतरा प्रोजेक्ट की लागत 27.59 करोड़ रुपए तय की गई। इसके लिए मार्च 2019 में दर अनुबंध स्वीकृत कर जून 2019 में ठेका दिया गया, जिसकी पूर्णता अवधि मई 2021 निर्धारित थी। दोनों ही शहरों में काम का जिम्मा नागपुर की कंपनी मेसर्स मल्टीअर्बन इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था। बार-बार बढ़ाई गई समय-सीमा अनुबंध के अनुसार दोनों प्रोजेक्ट्स को 24 महीनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य था। लेकिन मुख्य नगरपालिका अधिकारियों ने ठेकेदार के आवेदनों पर कोविड-19 महामारी और अन्य विविध बहाने स्वीकार करते हुए बार-बार समय-वृद्धि दी। जांजगीर-नैला में पहले 24 महीने की छूट देकर समय-सीमा अक्टूबर 2022 तय की गई। काम पूरा न होने पर 13 महीने की ढील देकर संशोधित तिथि नवंबर 2023 कर दी गई। अकलतरा में ठेकेदार को 715 दिनों की भारी-भरकम समय-वृद्धि देते हुए संशोधित पूर्णता तिथि 31 मार्च 23 तय की गई है।



