टाटा पंच ईवी की तकनीकी खामी कंपनी को पड़ी भारी, उपभोक्ता को 16.25 लाख रुपये देने का निर्देश
बिलासपुर के डॉक्टर स्वप्न कुमार दत्ता ने टाटा मोटर्स की टाटा पंच ईवी कार खरीदी थी, जिसमें शुरुआत से ही तकनीकी खामियां नजर आने लगी थीं। वाहन में बार-बार खराबी आने और कंपनी द्वारा किए गए दावों के विपरीत कम बैटरी रेंज मिलने के कारण डॉक्टर दत्ता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उपभोक्ता ने वाहन की गुणवत्ता को लेकर कंपनी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, वाहन में आ रही तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए इसे लगभग 10 बार सर्विसिंग के लिए भेजा गया। बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर काटने और मरम्मत के विभिन्न प्रयासों के बावजूद गाड़ी की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। तकनीकी खराबी जस की तस बनी रही, जिससे उपभोक्ता को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि उन्हें मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी।
गाड़ी के बार-बार खराब होने और ठीक न होने पर डॉक्टर स्वप्न कुमार दत्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। उन्होंने अपनी शिकायत में वाहन की गुणवत्ता और कंपनी की सेवा में गंभीर कमी का मुद्दा उठाया। जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया था।
जिला उपभोक्ता आयोग के इस फैसले के खिलाफ टाटा मोटर्स ने छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की थी। कंपनी का तर्क था कि उनकी सेवा में कोई कमी नहीं है और वाहन मानकों के अनुरूप है। हालांकि, राज्य आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की दलीलों को अपर्याप्त माना और तथ्यों के आधार पर उन्हें खारिज कर दिया।
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद टाटा मोटर्स की अपील को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने अपने अवलोकन में पाया कि 10 बार सर्विसिंग के बाद भी गाड़ी का ठीक न होना और उसमें तकनीकी खामियों का बने रहना सेवा में बड़ी लापरवाही और उत्पाद की गुणवत्ता में कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
आयोग ने अपने अंतिम आदेश में टाटा मोटर्स को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता डॉक्टर स्वप्न कुमार दत्ता को कुल 16.25 लाख रुपये का भुगतान करे। यह राशि वाहन की कीमत और उपभोक्ता को हुई परेशानियों के मुआवजे के रूप में निर्धारित की गई है। उपभोक्ता संरक्षण के लिहाज से इस फैसले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




