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बस्तर ओलिंपिक के तीसरे संस्करण का बिगुल बजा, 1 से 30 अक्टूबर तक खिलाड़ियों का पंजीयन

बस्तर संभाग के सुदूर वनांचल में छिपी खेल प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने के उद्देश्य से बस्तर ओलिंपिक के तीसरे संस्करण का बिगुल बज चुका है। खेल विभाग ने पूरे संभाग में खेल का माहौल तैयार करने के लिए संभागायुक्त और सभी जिलों के कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

इस खेल महाकुंभ में भाग लेने के लिए एक अक्टूबर से तीस अक्टूबर तक खिलाड़ियों का पंजीयन किया जाएगा। प्रशासन ने इस बार युवाओं की भागीदारी को दोगुना करने का संकल्प लिया है, ताकि बस्तर के प्रत्येक गांव और कस्बे से उभरती हुई खेल प्रतिभाएं मंच प्राप्त कर सकें।

यह विशाल प्रतियोगिता तीन चरणों में संपन्न कराई जाएगी। आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, पहले चरण में विकासखंड स्तरीय स्पर्धाएं 01 से 13 नवंबर तक आयोजित होंगी। इसके बाद विकासखंड स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चयनित खिलाड़ियों के बीच जिला स्तरीय मुकाबले 16 से 25 नवंबर तक खेले जाएंगे। अंतिम चरण में संभाग स्तरीय भव्य फाइनल 07 से 11 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा।

बस्तर ओलिंपिक के पिछले संस्करण में 3.91 लाख युवाओं ने अपना पंजीयन कराया था। संभाग के माओवाद प्रभावित और बीहड़ इलाकों के बालक और बालिकाओं ने मैदान में उतरकर अपने असाधारण खेल कौशल का परिचय दिया था। पिछले आयोजन ने न केवल आदिवासी अंचल के युवाओं में नई खेल भावना का संचार किया बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

बीते वर्ष पारंपरिक और आधुनिक दोनों वर्गों में खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था जिससे कई गुमनाम प्रतिभाओं को राज्य स्तर पर नई पहचान मिली। पिछले साल की इस अप्रत्याशित सफलता और युवाओं के अपार उत्साह को देखते हुए ही इस बार खेल विभाग ने पंजीयन का लक्ष्य दोगुना करने की ठोस कार्ययोजना तैयार की है।

बस्तर ओलिंपिक के तीसरे संस्करण में कुल 11 खेल स्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें एथलेटिक्स, 30 व 50 मीटर तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, हॉकी और वेटलिफ्टिंग शामिल हैं। महिला सीनियर वर्ग के लिए रस्साकसी को आकर्षक प्रदर्शनात्मक खेल के रूप में शामिल किया गया है।

प्रतियोगिता को 14 से 17 वर्ष आयु के जूनियर वर्ग तथा सीनियर महिला-पुरुष वर्ग में बांटा गया है। इस आयोजन की सबसे अनूठी और मानवीय पहल यह है कि माओवादी हिंसा में दिव्यांग हुए खिलाड़ियों और समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं को सीधे संभाग स्तरीय फाइनल में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

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