GST फर्जीवाड़ा: 16 साल पहले मरे व्यक्ति के नाम पर किरायानामा, 141.74 करोड़ का फर्जी कारोबार, 23.43 करोड़ की ITC


रायपुर में जीएसटी का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जीएसटी विभाग की जांच में पता चला कि अगस्त्य इंटरप्राइजेस ने कागजों में अलग-अलग फर्मों से 141.74 करोड़ रुपए का कारोबार दिखाया और इसके आधार पर 23.43 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ली।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला मामला किरायानामे का सामने आया। विभाग की जांच में यह बात उजागर हुई कि जिस व्यक्ति के नाम पर किरायानामा बनाया गया था, उसकी करीब 16 साल पहले मौत हो चुकी थी। यानी कागजों में जिस व्यक्ति को जगह किराए पर देने वाला बताया गया, वह उस समय जीवित ही नहीं था।
जीएसटी विभाग ने कंपनी से जुड़े दस्तावेजों और बिलों की जांच की। कंपनी ने अलग-अलग फर्मों से सामान खरीदने के बिल दिखाए थे, जिनके आधार पर आईटीसी का दावा किया गया। जांच के दौरान दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां मिलीं।
विभाग ने जिन कंपनियों के बिलों की जांच की, उनका भौतिक सत्यापन भी कराया। अधिकारियों ने संबंधित पते पर जाकर यह पता लगाने की कोशिश की कि वहां वास्तव में कंपनी चल रही है या नहीं। जांच में कई फर्में फर्जी या अस्तित्वहीन मिलीं।
कुछ लोगों ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस के साथ किसी तरह का कारोबार करने से इनकार कर दिया। बैंक खातों में हुए लेन-देन को लेकर भी कुछ लोगों ने इनकार किया।
पुलिस के मुताबिक, अमन अग्रवाल लाभांडी के सिग्नेचर होम में रहते हैं और अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक हैं। जीएसटी अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने अमन अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेज, बिल, बैंक खातों और संबंधित फर्मों की जानकारी की जांच कर रही है।




