यूरिन-लीक की समस्या छिपाती हैं महिलाएं:हर 5 में 1 को प्रॉब्लम; एक्सपर्ट बोले- शर्म छोड़ें, अब बिना चीरा लगाए भी सर्जरी संभव

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यूरिन लीक (मूत्र असंयम) और गर्भाशय के बाहर निकलने (यूटेराइन प्रोलैप्स) जैसी समस्याओं से कई महिलाएं वर्षों तक परेशान रहती हैं, लेकिन शर्म और जागरूकता की कमी के कारण डॉक्टर के पास नहीं पहुंचतीं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब इन बीमारियों का आधुनिक दवाओं और सर्जरी से सफल इलाज संभव है। वहीं, कई मामलों में बिना पेट पर चीरा लगाए प्राकृतिक वैजाइनल मार्ग से बच्चेदानी निकालने की सर्जरी भी की जा रही है। पेट पर चीरा नहीं, जल्दी रिकवरी अंबेडकर अस्पताल में आयोजित दो दिवसीय यूरोगायनेकोलॉजी एवं वैजाइनल सर्जरी कार्यशाला में प्रदेश की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आभा सिंह ने बताया कि प्राकृतिक वैजाइनल मार्ग से बच्चेदानी निकालने की सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी है। इसमें पेट पर कोई चीरा नहीं लगता, इसलिए मरीज को कम दर्द होता है, बाहर कोई निशान नहीं रहता और वह जल्दी स्वस्थ होकर घर जा सकती है। यूरिन लीक और प्रोलैप्स का इलाज संभव प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल ने बताया कि कई महिलाएं यूरिन लीक और गर्भाशय के बाहर आने जैसी समस्याओं को छिपाती रहती हैं। शर्म और संकोच के कारण समय पर इलाज नहीं करातीं, जबकि आधुनिक चिकित्सा में दवाओं और सर्जरी से इनका प्रभावी उपचार उपलब्ध है। महिलाओं में यूरिन लीक (यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस) एक आम लेकिन अक्सर छिपाई जाने वाली स्वास्थ्य समस्या है। इंडियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार हर पांच में से एक महिला को यह समस्या है। अस्पताल-आधारित अध्ययन में 3,000 महिलाओं को शामिल किया गया। इनमें 656 महिलाओं (21.8%) में यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस की समस्या पाई गई।शोध में पाया गया कि प्रभावित महिलाओं में 73.8% स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस से पीड़ित थीं। यानी खांसने, छींकने, हंसने या वजन उठाने जैसी स्थिति में अनजाने में पेशाब का रिसाव होता था। इसके अलावा 16.8% महिलाओं में मिक्स्ड और 9.5% में अर्ज इनकॉन्टिनेंस की समस्या मिली। शोधकर्ताओं ने बताया कि 40 वर्ष से अधिक आयु, एक से अधिक प्रसव, रजोनिवृत्ति, योनि प्रसव, हिस्टरेक्टॉमी, अधिक वजन, मधुमेह, अस्थमा तथा तंबाकू सेवन जैसे कारक यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस का खतरा बढ़ा सकते हैं। 100 से ज्यादा डॉक्टरों को मिला प्रशिक्षण पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय और डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में प्रदेश और देश के विशेषज्ञों ने 100 से अधिक डॉक्टरों एवं पीजी विद्यार्थियों को आधुनिक उपचार और शल्य तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। आयोजन वेजाइनल सर्जन सोसाइटी और मेनोपॉज सोसायटी के सहयोग से हुआ। लाइव सर्जरी में सिखाईं आधुनिक तकनीकें कार्यशाला में हिस्टेरोस्कोपी, यूरोडायनामिक स्टडी, स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस और वैजाइनल सर्जरी पर वैज्ञानिक सत्र हुए। विशेषज्ञों ने नॉन-डिसेंट वैजाइनल हिस्टरेक्टॉमी, सिस्टोसील रिपेयर, सैक्रो हिस्टेरोपेक्सी, वैजिनोस्कोपी, सिस्ट सर्जरी और अन्य जटिल प्रक्रियाओं का लाइव प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को छह आईएमएस क्रेडिट पॉइंट्स भी प्रदान किए गए।
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