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छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में तीन दिनों तक चले डीजी-आईजीपी के 60वें राष्ट्रीय सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिनों तक इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने सम्मेलन में शामिल देशभर के 250 से ज्यादा पुलिस अफसरों से कहा
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नेटग्रिड के माध्यम से रियल टाइम डेटा पर अपना फोकस बढ़ाएं, इससे अपराधियों की पहचान आसान होगी। इसके साथ ही देश में महिलाओं की सुरक्षा में भी तकनीक का उपयोग किया जाए। पीएम ने आम जनता खासकर युवाओं में पुलिस के प्रति सोच को बदलने के लिए भी काम करने के निर्देश दिए।
विकसित भारत, सुरक्षा आयाम थीम पर आयोजित सेमिनार में प्रधानमंत्री ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस को नेटग्रिड के अंतर्गत डेटाबेस का प्रभावी उपयोग करने और खुफिया जानकारी के लिए इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को पुलिस जांच में फोरेंसिक के उपयोग पर केस स्टडी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने शहरी और पर्यटन पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने और नए आपराधिक कानूनों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने आपदा के दौरान चक्रवात, बाढ़ और आपात स्थितियों के नियंत्रण में भी नई तकनीक का उपयोग करें। इस दौरान विजन 2047 की दिशा में पुलिस व्यवस्था के दीर्घकालिक रोडमैप, आतंकवाद-निरोध और कट्टरपंथ-निरोध में उभरते रुझान, विदेशों में रह रहे भारतीय भगोड़ों को वापस लाने की रणनीतियों और प्रभावी जांच के लिए फोरेंसिक को मज़बूत करने पर बातचीत हुई।
इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शा , राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह राज्य मंत्री और केंद्रीय गृह सचिव भी शामिल हुए।
नक्सल मुक्त गांवों का विकास जिम्मेदारी से करें
प्रधानमंत्री ने नक्सल इलाकों में ऐसे गांवों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के निर्देश दिए जहां से नक्सलियों का सफाया हो चुका है। वहां पर लोगों तक सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराया जाए ताकि उस क्षेत्र के लोगों का सरकार पर भरोसा बढ़े।
नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड से मजबूत पुलिसिंग नेटग्रिड या राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड, भारत में एक केंद्रीकृत खुफिया डेटाबेस है जो आतंकवाद-रोधी और कानून प्रवर्तन में सहायता के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों के डेटाबेस को जोड़ता है। 2008 के मुंबई हमलों के बाद इसे तैयार किया गया है। यह एयरलाइनों, बैंकों और दूरसंचार कंपनियों से दूसरे देश में रहने जाने वाले लोगों का रिकार्ड, बैंक विवरण, फोन डेटा और यात्रा इतिहास जैसे डेटा एकत्र करता है।
इसका लक्ष्य संदिग्धों की पहचान और उन पर नजर रखने तथा हमलों को रोकने के लिए खुफिया एजेंसियों और पुलिस को रीयल-टाइम डेटा प्रदान करना है। यह पूरी तरह से एक आईटी प्लेटफॉर्म है।
भास्कर एक्सपर्ट – तस्करी और घुसपैठ भी बड़ी चुनौती
अन्वेष मंगलम, रिटायर स्पेशल डीजी मध्यप्रदेश
भास्कर रिपोर्टर प्रमोद साहू के साथ
भारत आज जिस जटिलता का सामना कर रहा है। वह सिर्फ सीमा विवाद या आतंकवाद तक सीमित नहीं है। बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक संरचना और आर्थिक व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव है। हमारे पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार से लगातार बढ़ रहे खतरे सिर्फ सीमा पर तनाव से नहीं हैं। बल्कि मादक पदार्थ की तस्करी, अवैध हथियार, मानव तस्करी, अवैध घुसपैठ और संगठित अपराध भी हैं।
पाकिस्तान की ओर से राज्य प्रायोजित आतंक का खतरा सबसे गंभीर है। जिहादी आतंक को समर्थन दिया जा रहा है। पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते नशीली दवाओं और अवैध हथियारों की तस्करी लगातार बढ़ रही है। भारतीय मुसलमानों में जिहादी सोच फैलाने के प्रयास भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता की बड़ी वजह हैं।
कश्मीर, सियाचिन औ सर क्रीक पर सीमा विवाद स्थिति को और जटिल बनाया जा रहा है। बांग्लादेश अब पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क का बड़ा ट्रांजिट कॉरिडोर बन रहा है। असम, मेघालय, बंगाल और त्रिपुरा में अवैध घुसपैठ से जनसांख्यिक संतुलन पर असर दिखाई दे रहा है। धार्मिक उत्पीड़न के कारण हिंदुओं का पलायन और अवैध मुस्लिम माइग्रेशन सीमा राज्यों में सुरक्षा तनाव बढ़ा रहा है। ड्रग्स, हथियार, गौ-तस्करी और चोरी की गाड़ियों के नेटवर्क ने इसे संगठित अपराध का बड़ा केंद्र बना दिया है।
नेपाल में आईएसआई समर्थित अपराधियों का जमावड़ा हो रहा है। चीन की सक्रियता ने इस क्षेत्र को रणनीतिक रूप से ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। बॉर्डर पर कट्टरपंथी संगठन और चोरी के वाहनों के नेटवर्क के कारण भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा पर दबाव बढ़ा है।
म्यांमार भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए सबसे संवेदनशील सीमा बन चुका है। ड्रग और हथियारों की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। रोहिंग्या और कुकी-चीन शरणार्थियों की घुसपैठ से मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम में अस्थिरता बढ़ी है। उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों पर नियंत्रण एक निरंतर चुनौती बनी हुई है।
बीएसएफ पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों सीमाओं की सुरक्षा कर रही है, जिससे उस पर अत्यधिक दबाव है। बांग्लादेश सीमा के लिए अलग विशेषीकृत फोर्स गठित की जानी चाहिए। असम राइफल्स म्यांमार सीमा संभालने में संख्या और संसाधनों के लिहाज से कमजोर साबित हो रही है।
कानूनी और प्रशासनिक ढांचे की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। सीबीआई की कानूनी शक्ति सीमित है। जबकि एनआईए संसाधनों और फोर्स के मामले में कमजोर है। अदालतों में 5.5 करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं। सिर्फ चेक बाउंस के ही 50 लाख से अधिक केस अदालतों में अटके हुए हैं।
इससे अरबों रुपए फंसे हुए हैं। इसी वजह से जनता का न्यायिक व्यवस्था व बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा कमजोर होते जा रहे है। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में कुछ वकीलों का समूहों का प्रभाव भी निष्पक्ष न्याय पर सवाल खड़ा कर रहा है। इन अपराध नेटवर्कों के पीछे उद्देश्य सिर्फ आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करना है।
भारत को सुरक्षा नीति, सीमा प्रबंधन, कानूनी सुधार और आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़े बदलाव की जरूरत है, अन्यथा स्थिति और कठिन हो सकती है।
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