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महासमुंद में गैर इरादतन हत्या के एक मामले में आरोप साबित होने पर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आनंद बोरकर ने छह आरोपियों को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग 2 और 149 के तहत दी गई है।
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कोर्ट ने सभी दोषियों पर 500-500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर उन्हें दो-दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त, धारा 325 / 149 के तहत तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 200-200 रुपये का अर्थदंड, तथा धारा 148 के तहत एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास और 100-100 रुपये का अर्थदंड भी सुनाया गया है। अर्थदंड न चुकाने पर क्रमशः दो-दो माह और एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
जानिए पूरा मामला
अभियोजन के अनुसार, यह घटना सांकरा थाना क्षेत्र के ग्राम सपोस में 5 मार्च 2024 की रात करीब 9 बजे हुई थी। शंकर का नाती अजय ध्रुव अपने दोस्तों सोमनाथ, तपुराज और हेमंत के साथ गांव में घूम रहा था। तभी उन्हें हेतराम धृतलहरे मिला, जिसने उन पर चोरी का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की और तपुराज और हेमंत के साथ मारपीट की।
हेतराम ने इसके बाद अपने साथियों देवराज, करण, चंद्रप्रकाश, सुनील और मनोहर को फोन करके बुलाया। इन सभी ने मिलकर अजय और उसके दोस्तों के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट की। घटना के बाद अजय अपने दोस्तों के साथ घर लौट आया और अपने दादा शंकर ध्रुव को पूरी बात बताई।
आरोपियों ने लोहे के रॉड से किया हमला
शंकर ध्रुव ने हेतराम से मिलकर पूछा कि उसने बिना कारण उनके लड़कों के साथ मारपीट क्यों की। इस पर आरोपी हेतराम धृतलहरे (34), मनोहर धृतलहरे (40), करण धृतलहरे (19), देवराज धृतलहरे (22), चंद्रप्रकाश पटेला (18) और सावित्रीपुर निवासी सुनील अनंत (19) ने एक राय होकर शंकर पर हमला कर दिया। उन्होंने हाथ में रखे लोहे के रॉड से शंकर के साथ मारपीट की और उसे जमीन पर गिरा दिया।
शंकर को बचाने आई उसकी बहू हीराबाई ध्रुव के साथ भी आरोपियों ने मारपीट की, जिससे उसे भी चोटें आईं। घटना को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।
शंकर को घायल अवस्था में इलाज के लिए नीजि वाहन से पिथौरा लेकर गए जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शिकायत पर पुलिस ने धारा 294, 323,147, 302 का अपराध दर्ज कर जांच के बाद मामला कोर्ट को सौंपा था।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने पाया कि मृतक शंकर बातचीत के लिए आया था, और शंकर के हेतराम को पत्थर मारने की वजह से विवाद बढ़ गया। इसके परिणामस्वरूप आरोपियों ने शंकर पर हमला किया।
मामले में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों का उद्देश्य शंकर को मारकर जानलेवा चोट पहुंचाना नहीं था। इसलिए, उन्हें हत्या (धारा 302) के बजाय हत्या की गलती (धारा 304 भाग II) और धारा 149 के तहत दोषी ठहराना न्यायसंगत माना गया। इस मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक तेजेंद्र कुमार चंद्राकर ने पैरवी की।
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