द ब्लेज ई न्यूज,जशपुर (रोहित यादव)। विक्षोभ के असर से रूक रूक कर हो रही भारी बारिश के बीच जिले में हाथियों का कहर किसानों के लिए दोहरी मुसीबत साबित हो रहा है। जिले के नागलोक के नाम से मशहूर तपकरा वन परिक्षेत्र में इन दिनों अलग-अलग क्षेत्र में 28 हाथी डेरा जमाए हुए हैं। इतना ही नहीं 20 हाथियों के एक बड़े दल ने ओडिसा व छत्तीसगढ़ की अंर्तराज्यी सीमा पर जमा हुआ है। यह दल भी किसी भी समय तपकरा में प्रवेश कर सकता है। वनविभाग के अनुसार तपकरा वन परिक्षेत्र के बनगांव बीट में 1,हाथीबेड़ में 13,खारीबहार में 3 और सागजोर में 11 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। रेंजर अकांक्षा लकड़ा ने बताया कि हाथियों की इन दलों की निगरानी में दो हाथी मित्र दल जुटे हुए हैं। ये दल हाथियों की उपस्थिति की जानकारी दी जा रही है। गांव में मुनादी कराने के साथ ही इंटरनेट मिडिया के माध्यम से लोगों को सचेत कर जंगल से दूर रहने की अपील की जा रही है।
अंर्तराज्यी सीमा पर जमे 20 हाथी –
जिले में विचरण कर रहे हाथियों के अलावा छत्तीसगढ़ और ओडिसा की अंर्तराज्यी सीमा पर 20 हाथियों के बड़े दल ने डेरा जमाया हुआ है। जानकारी के अनुसार हाथियों का यह दल ओडिसा के सुंदरगढ़ जिले के किजिंरकेला वन परिक्षेत्र में जमे हुए है। दरअसल हाथियों के इस समूह में 30 से 32 हाथी शामिल है। इनमें से 11 हाथी अलग हो कर छत्तीसगढ़ के सागजोर पहुंच गए है। वनविभाग के अधिकारियों का मानना है कि छत्तीसगढ़ की सीमा से महज 10 से 12 किलोमीटर की दूरी पर विचरण कर रहा हाथियों का यह बड़ा दल किसी भी समय छत्तीसगढ़ मे प्रवेश कर सकता है। इसे देखते हुए ओडिसा सीमा पर स्थित पेरवांआरा,सागजोर जैसे गांव को भी एलर्ट पर रखा गया है।
जिले का सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है तपकरा –
उल्लेखनिय है कि छत्तीसगढ़,ओडिसा और झारखंड की अंर्तराज्यी सीमा पर स्थित तपकरा वन परिक्षेत्र जशपुर जिला का सबसे अधिक हाथी प्रभावित क्षेत्र है। यहां के घने जंगल और प्रचुर मात्रा में पानी की उपलब्धता अतिकायों को खूब आकर्षित करता है। यही कारण है कि यहां साल के बारहों महिने हाथियों की हलचल बनी रहती है। इस समय खेतों में धान,दलहन के साथ सब्जी की फसल मौजूद है। हाथियों की हलचल बढने से बरसते हुए पानी के बीच फसल को बचाने की चिंता किसानों को सताने लगी है।
‘‘तपकरा रेंज में विचरण कर रहे हाथियों की हाथी मित्र दल द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र के रहवासियों को मुनादी और इंटरनेट माध्यम से सूचित कर जंगल से दूर रहने की अपील की जा रही है।’’
आकांक्षा लकड़ा,रेंजर,तपकरा।
