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कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। जिले में 20 से 25 साल की सेवा पूरी कर चुके सैकड़ों प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षकों की सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) का आज तक ऑडिट नहीं हो सका है। हैरानी की बात यह है कि कवर्धा से राजनांदगांव स्थित स्थानीय संपरीक्षक कार्यालय की दूरी महज 120 किलोमीटर है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालयों की सुस्ती के कारण 25 साल में भी फाइलें वहां तक नहीं पहुंचीं। इसका सीधा असर अब शिक्षकों की पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों पर पड़ने की आशंका है। मामले को लेकर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चंद्रवंशी के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा से मिला। एसोसिएशन ने कहा कि यदि समय रहते सेवा पुस्तिकाओं का ऑडिट नहीं हुआ, तो सेवानिवृत्ति के समय शिक्षकों को आर्थिक और तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि बिना ऑडिट के वेतन निर्धारण कानूनी रूप से अधूरा माना जाता है। यदि किसी शिक्षक को अधिक वेतन मिला है, तो रिटायरमेंट के समय लाखों रुपए की रिकवरी निकल सकती है। वहीं कम वेतन निर्धारण की स्थिति में एरियर्स अटक सकता है। जिले में शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति पंचायत विभाग के तहत 1998 से शुरू हुई थी। बाद में 2018 में उनका स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हुआ। इस दौरान 2003, 2007, 2013 और 2018 में वेतन निर्धारण (पे-फिक्सेशन) किया गया। लेकिन नियमानुसार स्थानीय संपरीक्षक राजनांदगांव और कोष एवं लेखा दुर्ग से सेवा पुस्तिका का सत्यापन नहीं कराया गया। नियमों के मुताबिक हर वेतन निर्धारण के बाद सेवा पुस्तिका का ऑडिट अनिवार्य होता है। ताकि भविष्य में वेतन, पेंशन और अन्य वित्तीय लाभों में कोई विवाद न हो। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी एफआर वर्मा ने सभी बीईओ और डीडीओ प्राचार्यों को सेवा पुस्तिका सत्यापन कराने के निर्देश जारी किए हैं। टीचर्स एसोसिएशन की मांग पर पहले चरण में जिले के प्रत्येक ब्लॉक से 100-100 शिक्षकों की फाइलें प्राथमिकता के आधार पर नांदगांव ऑडिट कार्यालय भेजी जाएंगी।
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