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चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड में पुलिस के “ऑपरेशन प्रहार” के तहत हरिद्वार में एक बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी भारतीय पहचान बनाकर यहां रह रही थी। सत्यापन अभियान के दौरान खुलासा हुआ कि महिला अपना नाम बदलकर “स्वीटी” बताकर रह रही थी। जांच में उसकी असल पहचान सलेहा बेगम के रूप में हुई, जो बांग्लादेश के कुमीला जिले की रहने वाली है। पुलिस के मुताबिक, उसने फर्जी डॉक्यूमेंट के जरिए आधार, पैन और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए और इन्हीं के आधार पर भारतीय पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। इस मामले में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निवासी श्यामदास को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसने महिला के साथ रहकर फर्जी डॉक्यूमेंट बनवाने में उसकी मदद की। पुलिस इस पूरे मामले को नेटवर्क से जोड़कर जांच कर रही है। सत्यापन में सामने आई असलियत 08 अप्रैल को ज्वालापुर में चल रहे सत्यापन अभियान के दौरान पुलिस और LIU टीम को एक महिला पर शक हुआ। वैष्णवी एन्क्लेव में रहने वाली महिला ने खुद को “स्वीटी” बताया, लेकिन पूछताछ के दौरान उसकी बातों में विरोधाभास मिला। सख्ती से पूछने पर उसने अपनी असली पहचान बताई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। बांग्लादेश की निकली महिला जांच में सामने आया कि महिला का नाम सलेहा बेगम है और वह बांग्लादेश के कुमीला जिले की रहने वाली है। पुलिस को उसके पास से बांग्लादेश का पासपोर्ट और नेशनल आईडी कार्ड मिला। इससे यह साफ हो गया कि वह विदेशी नागरिक होते हुए भी भारत में फर्जी पहचान के सहारे रह रही थी। सोशल मीडिया से जुड़ा कनेक्शन पूछताछ में महिला ने बताया कि पति से अलग होने के बाद उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। इसी दौरान 2023 में वह सोशल मीडिया के जरिए श्यामदास नाम के व्यक्ति के संपर्क में आई। श्यामदास के कहने पर वह भारत आई। पहले दिल्ली में रही और बाद में दोनों हरिद्वार आकर रहने लगे, जहां से यह पूरा मामला सामने आया। फर्जी दस्तावेजों से बनाई पहचान हरिद्वार में रहकर महिला ने “स्वीटी” नाम से नई पहचान बना ली। पुलिस जांच में सामने आया कि उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और भारतीय पासपोर्ट तक बनवा लिया था। ये सभी दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे और इन्हीं के आधार पर वह लंबे समय तक बिना पकड़े रह रही थी। साथी की भूमिका और गिरफ्तारी इस मामले में श्यामदास (निवासी बिलासपुर, छत्तीसगढ़) को भी गिरफ्तार किया गया है। वह महिला के साथ रह रहा था और उसने ही उसे शरण देने के साथ फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद की। दोनों के खिलाफ ज्वालापुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है। पहले भी सामने आ चुके ऐसे केस एसएसपी नवनीत भुल्लर के मुताबिक, यह इस तरह का तीसरा मामला है। इससे पहले भी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड बनाने से जुड़े दो मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज बनाने का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा है और इसमें और कौन लोग शामिल हैं। ऑपरेशन प्रहार के तहत लगातार कार्रवाई पुलिस के अनुसार, ऑपरेशन प्रहार के तहत अब तक 70 से अधिक वांछित और वारंटी आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान चलाकर 81/83 पुलिस एक्ट में भी कार्रवाई की गई है। आगामी कांवड़ यात्रा, चारधाम यात्रा और कुंभ को देखते हुए पुलिस ऐसे सभी मामलों पर सख्त नजर बनाए हुए है।
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