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छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। चर्चित ऑनलाइन सटोरिया बाबू खेमानी के मददगार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। महासमुंद से संदीप इसरानी उर्फ गोलू और उसके साथी मनसून रजा सट्टे को पकड़ा गया है। जांच में पता चला कि बाबू खेमानी सट्टे का पैसा संदीप और मनसून के खातों में डालकर वापस अपने खाते में मंगाता था और इसके बदले में उन्हें कमीशन देता था। इस केस में अब तक कुल 29 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, संदीप, बाबू खेमानी का रिश्तेदार है। वह बाबू खेमानी के बुआ का लड़का है। लंबे समय से ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि संदीप इसरानी, बाबू खेमानी और उसकी टीम को बैंक खाते, सिम कार्ड और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराता था। खेमानी से जब्त सिम संदीप के नाम पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बाबू खेमानी से जब्त किए गए कई सिम कार्ड भी संदीप इसरानी के नाम पर दर्ज पाए गए हैं। जांच में पता चला कि आरोपी लोगों से धोखे से मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट लेते थे और उन्हें सट्टा नेटवर्क में इस्तेमाल करते थे। पकड़े गए आरोपी संदीप इसरानी उर्फ गोलू और मनसून रजा सट्टे से आए पैसों को अपने बैंक खातों में लेते थे और फिर वापस गिरोह तक पहुंचाते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था। सट्टा कारोबार से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी भी खंगाली जा रही है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े बाकी आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। मददगारों के खिलाफ जांच जारी अधिकारियों का कहना है कि, पूछताछ पूरी होने के बाद पूरे मामले का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। प्रदेश में ऑनलाइन सट्टे और अवैध गेमिंग ऐप्स के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। जांच एजेंसियां अब उन लोगों को भी निशाने पर ले रही हैं, जो सीधे तौर पर सट्टा नहीं चला रहे, लेकिन संसाधन उपलब्ध कराकर नेटवर्क को मजबूत बना रहे हैं। पढ़िए कौन है बाबू खेमानी बाबू उर्फ गुलशन खेमानी रायपुर का इंफ्लुएंसर है। रायपुर पुलिस ने 16 अप्रैल को मुंबई से गिरफ्तार किया था। बाबू खेमानी पर ऑनलाइन सट्टा खिलाने का आरोप है। पुलिस बाबू खेमानी के भाई और पिता को भी तलाश कर रही है। पुलिस के मुताबिक, बाबू उर्फ गुलशन खेमानी और उसका भाई करण ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित करने के लिए 50 से अधिक आईडी का इस्तेमाल करते थे। इसके लिए कई म्यूल बैंक खातों का भी सहारा लिया जाता था। पुलिस ने बाबू, करण और उनके परिवार के बैंक खातों के लेनदेन की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि बाबू पहले महादेव बुक ऐप से जुड़ा था, लेकिन बाद में उसने अपना अलग नेटवर्क खड़ा कर लिया। सोशल मीडिया पर खुद को इन्फ्लुएंसर बताने वाला बाबू इंस्टाग्राम पर वीडियो और रील बनाता था, जिनमें कई आपत्तिजनक कंटेंट भी शामिल हैं। खुद को ‘सेलिब्रिटी’ समझता था खेमानी पूरे मामले में जांच के दौरान एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। बाबू खेमानी खुद को एक ‘सेलिब्रिटी’ की तरह प्रोजेक्ट करता था। बाबू का असली नाम गुलशन खेमानी है, लेकिन बाबू खेमानी के नाम से ही उसे पॉपुलैरिटी मिली। सोशल मीडिया पर उसकी मौजूदगी सिर्फ एक्टिव रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी इमेज बिल्डिंग का हिस्सा थी। वह लगातार हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल को दिखाने वाले पोस्ट करता था। जैसे महंगी कारें, विदेश यात्राएं, पार्टियां और नेटवर्किंग ताकि फॉलोअर्स के बीच उसकी एक सफल और प्रभावशाली व्यक्ति की छवि बन सके। इस दिखावे के जरिए वह खुद को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश करता था, जिसने कम समय में बड़ी सफलता हासिल की है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, वह अपने फॉलोअर्स के बीच सिर्फ एक आम इंफ्लुएंसर नहीं, बल्कि एक ‘बड़ा नाम’ बनकर उभरना चाहता था। इसी इमेज को मजबूत करने के लिए उसने क्रिकेट, खासकर आईपीएल से जुड़ा एक अलग एंगल तैयार किया। अब पढ़ें बाबू खेमानी किस तरह से करता था काम क्लब, होटल और सराफा कारोबारी आरोपी से जुड़े बताया जा रहा है कि राजधानी में सट्टेबाजी का नेटवर्क काफी बड़ा है, जिसमें क्लब, होटल और सराफा कारोबारी तक जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और आने वाले दिनों में बड़े खुलासे हो सकते हैं। करोड़ों रुपए का लेन-देन हुए ‘3 Stumps’ ऐप में जानकारी के अनुसार, ‘3 Stumps’ ऐप के जरिए बड़े स्तर पर ऑनलाइन सट्टा खेला जा रहा था। बाबू खेमानी ही इस ऐप को ऑपरेट कर रहा था। इसके जरिए करोड़ों रुपए के लेन-देन की आशंका है। पुलिस ने बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की है। रेड के दौरान दस्तावेज-इलेक्ट्रानिक गैजेक्ट पुलिस ने जब्त किया है। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच में जुटी है।
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