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सक्ती जिले के डभरा थाना क्षेत्र में बहनोई की हत्या के मामले में न्यायालय ने साले और उसके एक साथी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायालय सक्ती ने आरोपी रामेश्वर चंद्रा और सीलाराम कहरा को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद और अर्थदंड से दंडित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक उदय कुमार वर्मा ने पैरवी की। अभियोजन के अनुसार, यह घटना 3 मई 2025 को हुई थी। मृतक अशोक उर्फ दिलीप चंद्रा अपनी पत्नी ईश्वरी चंद्रा के साथ अक्सर मारपीट करता था। घटना से लगभग एक माह पहले भी पत्नी प्रताड़ना से तंग आकर अपने मायके ग्राम फरसवानी में रह रही थी। घटना वाले दिन मृतक अशोक अपनी पत्नी के मायके पहुंचा और उसके साथ फिर मारपीट करने लगा। इसी बात से नाराज होकर पत्नी का भाई रामेश्वर चंद्रा और उसका दोस्त सीलाराम कहरा, अशोक को गांव के अमरईया खार ले गए। बेल्ट और सोंटे से पिटाई के बाद घायल की मौत वहां दोनों आरोपियों ने बेल्ट और नीम के सोंटा से अशोक चंद्रा की बेरहमी से पिटाई की। गंभीर रूप से घायल अशोक को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डभरा ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर डभरा पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मेमोरेंडम कथन दर्ज किए और घटना में इस्तेमाल बेल्ट और सोंटा जब्त किया। सबूत मिलने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 23 गवाहों के बयान दर्ज कराए। सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार शिवहरे ने दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) सहपठित धारा 3(5) के तहत दोषी ठहराया। उन्हें उम्रकैद और एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त छह माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी रामेश्वर चंद्रा का आपराधिक इतिहास रहा है। वह पहले भी अपने पिता की हत्या के मामले में जेल जा चुका है।
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