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भास्कर न्यूज | नारायणपुर जिस अबूझमाड़ के भूगोल को दशकों तक अज्ञात और अशांत कहकर विकास की फाइलों से बाहर रखा गया, वहां अब बदलाव की बयार बहने लगी है। बुधवार को जिले का सुदूर ग्राम कुतुल एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। आजादी के बाद पहली बार कोई कैबिनेट मंत्री उबड़-खाबड़ रास्तों और चुनौतियों को पार कर इस गांव की सरजमीं पर उतरा। इमली के पेड़ की घनी छांव तले जब वन मंत्री केदार कश्यप ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठे, तो वर्षों से जमी उपेक्षा की बर्फ पिघलती नजर आई। चौपाल का नजारा किसी सरकारी तामझाम वाला नहीं, बल्कि आत्मीयता से भरा था। मंत्री कश्यप ने बिना किसी प्रोटोकॉल के ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया। ग्रामीणों के लिए यह दृश्य अकल्पनीय था जिस सरकार को उन्होंने सिर्फ राशन कार्ड या चुनावी चर्चाओं में सुना और देखा था, वह आज उनके गांव की धूल और छांव में मौजूद थी। मंत्री ने न केवल लोगों की समस्याएं सुनीं, बल्कि मौके पर मौजूद अधिकारियों को कड़ी हिदायत देते हुए तत्काल समाधान के निर्देश दिए। भावुक हुए केदार; बोले यह दौरा नहीं, संकल्प की सिद्धि है: संवाद के दौरान मंत्री केदार कश्यप भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कुतुल जैसे दुर्गम इलाकों तक पहुंचना कभी महज एक सपना लगता था, लेकिन आज यह हकीकत है। यह सिर्फ मेरा दौरा नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के उस संकल्प की सिद्धि है, जिसमें अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना ही एकमात्र लक्ष्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डबल इंजन की सरकार का मकसद सिर्फ सड़कें बनाना नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के लोगों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास जगाना है। कुतुल के ग्रामीणों के चेहरों पर जो मुस्कान और आंखों में जो चमक दिखी, वह इस बात का सबूत है कि अबूझमाड़ अब पिछड़ा रहने को तैयार नहीं है। यह चौपाल उस भरोसे की वापसी का प्रतीक है, जो वर्षों के नक्सल प्रभाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण कहीं खो गया था। मंत्री केदार कश्यप ने कहा अबूझमाड़ अब अबूझ नहीं रहेगा। अपने संबोधन में कश्यप ने पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता सुख भोगने वालों ने अबूझमाड़ को विकास से महरूम रखा ताकि उनकी राजनीति चमकती रहे। भाजपा सरकार में अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और शुद्ध पेयजल प्राथमिकता है।
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