भास्कर न्यूज | संगम ग्राम पंचायत जवेली के आश्रित ग्राम परकट्टा पारा के 12 परिवारों के 120 लोगों ने सिस्टम से थक-हारकर आत्मनिर्भरता की अनोखी, लेकिन मजबूरी भरी कहानी लिखी है। बस्ती के दोनों सरकारी हैंडपंप महीनों से आयरनयुक्त पानी दे रहे थे। शिकायत के बाद भी जब पीएचई विभाग और सरपंच की नींद नहीं खुली, तो ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया। एक हैंडपंप के बोर में खुद मोटर डाल दी। अब पूरा पारा इसी जुगाड़ के भरोसे प्यास बुझा रहा है। ग्रामीण रामदास दुग्गा ने बताया, मजबूरी में हमें खुद पैसे लगाने पड़े। प्रशासन को हमारी फिक्र नहीं है। जल जीवन मिशन के तहत परकट्टा पारा के पास पानी टंकी का निर्माण दो साल पहले शुरू हुआ था। वह आज भी अधूरा पड़ा है। वार्ड पंच हिरौंदा दुग्गा ने आक्रोश जताते हुए कहा कि आज तक इस मिशन से ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ। पेयजल ही नहीं, यहां 20 छोटे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी तक नहीं है। मासूमों को 3 किमी दूर टेकामेटा जाना पड़ता है। बारिश में यह कतई संभव नहीं होता। ग्रामीण उदे राम, मानसाय और बिसंती ने चेतावनी दी। यदि जल्द ही शुद्ध पानी, टंकी निर्माण और आंगनबाड़ी की मांग पूरी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। शीघ्र पूरा कराएंगे जल जीवन मिशन का काम: एसडीओ पीएचई अंतागढ़ बलराज धारवाड़े ने कहा कि आयरनयुक्त पानी की समस्या है। ग्रामीणों ने मोटर लगाई है। उसे नियमित रूप से चलाते रहने से पानी की क्वालिटी में सुधार आएगा। जल जीवन मिशन का काम शीघ्र पूरा कराया जाएगा। सुब्रत मल्लिक, वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा कि हैंडपंप से निकलने वाला लाल पानी अत्यधिक आयरन और हेवी मेटल्स की मौजूदगी को दर्शाता है। इसे लगातार पीना शरीर के लिए स्लो पॉइजन (धीमा जहर) जैसा है। शरीर ज्यादा आयरन पचा नहीं पाता। इससे हेमोक्रोमैटोसिस हो सकता है। यह लिवर सिरोसिस और किडनी डैमेज का कारण बनता है। यह पानी आंतों को प्रभावित करता है। इससे क्रोनिक कब्ज, पेट दर्द, उल्टी होती है। पाचन तंत्र खराब हो जाता है। इससे दांत काले-पीले होने लगते हैं।
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