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बालोद जिले में बाल विवाह का एक मामला सामने आया है, जहां शादी की तय उम्र से दो महीने कम होने के बावजूद युवक की शादी करा दी गई। मामला उजागर होते ही प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम सक्रिय हुई और विवाह को शून्य घोषित कर दिया गया। दुल्हन को रात में ससुराल लाया गया था, जिसे बुधवार सुबह पुलिस और विभागीय टीम ने सुरक्षित उसके मायके राजनांदगांव भेज दिया। जानकारी के मुताबिक, युवक की वर्तमान उम्र 20 वर्ष 10 माह है, जबकि कानूनन शादी के लिए लड़के की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष निर्धारित है। इसके बावजूद मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात युवक ने राजनांदगांव स्थित लड़की के घर जाकर विवाह की रस्में पूरी कीं और दुल्हन को अपने गांव भर्रीटोला ले आया। सोशल मीडिया से खुला मामला बुधवार सुबह सोशल मीडिया पर यह मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। टीकावन कार्यक्रम से पहले ही कार्रवाई करते हुए विवाह को शून्य घोषित कर दिया गया। उम्र को लेकर खुला बड़ा अंतर जांच में सामने आया कि युवक के आधार कार्ड में जन्मतिथि 13 जून 2002 दर्ज है, जबकि स्कूल के दाखिला पंजी में जन्मतिथि 13 जून 2005 है। नियमों के अनुसार दाखिला पंजी में दर्ज जन्मतिथि को मान्य माना जाता है, जिससे युवक नाबालिग साबित हुआ। प्रशिक्षण और निगरानी पर उठे सवाल इस घटना के बाद विभागीय प्रशिक्षण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बाल विवाह रोकने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरपंच और सचिव को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है, इसके बावजूद इतनी बड़ी चूक होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। दो महीने बाद फिर होगी शादी एसडीएम सुरेश साहू, महिला बाल विकास अधिकारी समीर पांडेय और बाल संरक्षण अधिकारी गजानंद साहू ने दोनों पक्षों को समझाइश दी। पंचनामा और सहमति पत्र भरवाया गया, जिसमें तय हुआ कि दो माह बाद, जब युवक 21 वर्ष का हो जाएगा, तब विधिवत विवाह कराया जाएगा। अधिकारी की अपील जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी समीर पांडेय ने लोगों से अपील की है कि लड़के की उम्र 21 वर्ष और लड़की की उम्र 18 वर्ष पूरी होने के बाद ही विवाह करें। बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें सजा का प्रावधान है।
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