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राजनांदगांव पुलिस ने ‘मिशन साइबर सुरक्षा’ अभियान के तहत कार्रवाई की है। पुलिस ने संगठित साइबर ठगी करने वाले गिरोह पर कार्रवाई करते हुए ऐसे 14 लोगों को गिरफ्तार किया है जो ठगी की रकम को अपने बैंक खातों के जरिए आगे भेजते थे। ये सभी आरोपी म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी के पैसे को इधर-उधर करते थे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर साइबर सेल और थाना कोतवाली की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। जांच के दौरान यह पाया गया कि पकड़े गए आरोपियों के 14 बैंक खातों के माध्यम से लगभग 50 लाख रुपए से अधिक का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। ये खाते भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के पोर्टल पर संदिग्ध पाए गए थे। ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए आरोपियों ने विभिन्न प्रतिष्ठित बैंकों का इस्तेमाल किया था, जिनमें SBI, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, PNB, इंडियन ओवरसीज बैंक, कैनरा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन बैंक शामिल हैं। मामूली लालच में बैंक खाते और एटीएम दिए पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने मामूली कमीशन या पैसों के लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम और चेकबुक अज्ञात ठगों को उपलब्ध कराए थे। पुलिस ने इनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2) और 317(4) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने जिन 14 आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा है, उनमें मिहीर साहू, भरत वैष्णव, शेख फैजान (दुर्ग), कुणाल सिंह, कुमारू लाल (केसीजी), दुकालू राम साहू, मोनिका यादव, शेख सैफूद्दीन, संगीता साहू, केजा बाई यादव, राधिका यादव, मुकेश निर्मलकर, किरण रहकवार और शेखर पसिने (भिलाई) शामिल हैं। राजनांदगांव पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या चेकबुक किसी अनजान व्यक्ति को न दें। पुलिस ने कहा कि किसी के बहकावे में आकर अपने दस्तावेज साझा करना आपको जेल पहुंचा सकता है और म्यूल अकाउंट के रूप में अपना खाता किराए पर देना एक गंभीर अपराध है।
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