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भिलाई के रिसाली इलाके में सिम कार्ड के नाम पर एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक युवक के नाम से सिम कार्ड लेकर उसे किसी और को दे दिया गया और उसका इस्तेमाल अवैध आर्थिक लेनदेन में किया जा रहा था। पीड़ित युवक ने इस मामले की शिकायत थाना नेवई में की है, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रिसाली गांव ढोल चौक निवासी आयुष ताम्रकार, जो बीटेक का छात्र है। आयुष ने अपनी शिकायत में बताया कि करीब 5-6 महीने पहले उसे एक मोबाइल दुकान संचालक टी भार्गव संगम डेयरी लाइन, मैत्री नगर स्थित दुकान पर ले गया था। वहां उसके नाम से एक सिम कार्ड लिया गया। इसके लिए उससे 200 रुपये भी लिए गए और फोटो व ऑनलाइन फॉर्म जैसी सभी प्रक्रिया पूरी कराई गई। प्रक्रिया पूरी करने के बाद नहीं दिया सिम
आयुष का कहना है कि सिम लेने के बाद उसे वह सिम कार्ड नहीं दिया गया और पैसे भी वापस नहीं किए गए। जब उसने कई बार इस बारे में पूछा तो दुकान संचालक ने बताया कि वह सिम उसने अपने साथियों को दे दिया है। आगे पूछताछ करने पर यह भी सामने आया कि इस काम में हर्षित साहू, दीपक प्रजापति, ज्ञानेश और एक अन्य व्यक्ति फैजान कुरैशी शामिल हैं। अधिक पैसों में बेचता था सिम
पुलिस की जांच में ये बात सामने आई है कि आरोपी टी. भार्गव राव द्वारा प्रार्थी को अपने साथ मोबाइल दुकान ले जाकर उसके नाम से सिम जारी कराया गया और उसे स्वयं रख लिया गया। इसके बाद उक्त सिम को कमीशन के आधार पर क्रमशः अन्य आरोपियों को अधिक राशि में बेचा दिया। जिससे एक संगठित श्रृंखला बनाकर सिम कार्ड का उपयोग अवैध आर्थिक लेन-देन में किया जा रहा था। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त 3 मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। प्रकरण में संलिप्त एक अन्य आरोपी फैजान कुरैशी फरार है, जिसकी पतासाजी जारी है। संगठित गिरोह की आशंका
शिकायत में यह भी बताया गया है कि ये सभी लोग मिलकर अलग-अलग लोगों के नाम पर सिम कार्ड लेते हैं और उनका गलत इस्तेमाल करते हैं। इन सिम कार्ड के जरिए पैसों का लेनदेन कर अवैध कमाई की जा रही है। आसपास के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार ऐसे करीब 40 से 50 सिम कार्ड का दुरुपयोग किया जा रहा है। हर सिम पर कमीशन का आरोप
प्रार्थी आयुष ने यह भी आरोप लगाया कि दुकान संचालक ने खुद माना कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर हर सिम पर 400 से 500 रुपये कमीशन लेकर यह काम करता है। इस पूरे मामले से साफ है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक संगठित तरीके से चल रहा नेटवर्क हो सकता है, जो लोगों के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहा है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और अब तक कितने सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया है।
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