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भाजपा में कोर कमेटी से दिग्गजों को बाहर करने के बाद अब बुधवार को प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक में 23 विधायकों को सदस्य न बनाए जाने पर नया विवाद शुरू हो गया है। भाजपा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रदेश कार्यसमिति सदस्य की टीम में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नहीं रखा गया है। राष्ट्रीय परिषद में सभी विधायकों को सदस्य बनाया जाता है। भाजपा के 54 विधायक हैं। भाजपा संगठन की परिपाटी के अनुसार सभी विधायक प्रदेश कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए जाते हैं। लेकिन किरण देव की नई टीम में 14 मंत्री और 17 विधायकों को ही जगह दी गई। बाकी विधानसभा के सचेतक सुशांत शुक्ला, पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े, अनुज शर्मा, ललित चंद्राकर, धर्मजीत सिंह, ईश्वर साहू, प्रबोध मिंज जैसे 23 विधायकों को जगह नहीं दी गई। बुधवार को बैठक जैसे शुरू हुई तो यह चर्चा का विषय बन गया। क्योंकि जिस बैठक में महापौर, जिला प्रभारी, निगम-मंडल के अध्यक्षों को बुलाया गया हो वहां 23 विधायकों का न पहुंचना बड़ी राजनीति का केंद्र बन गया। विधायकों ने गुटबाजी का आरोप लगाया प्रदेश कार्यसमिति बैठक से दूर रहने पर कई विधायकों ने दबी जुबान में गुटबाजी का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि हम राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन अपने ही राज्य की बैठक से बाहर हैं। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भाजपा में हमेशा एक समान रखा गया है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि जब पक्षपात किया गया। जो विधायक कुछ नेताओं के करीब थे उन्हें कार्यसमिति में जगह दे दी गई लेकिन जिन्होंने मेहनत कर मुकाम पाया आज वे बाहर हैं। जून में मिल जाएगा नया प्रभारी
नई प्रदेश कार्यसमिति और कोर कमेटी की बैठक में पहली बार ऐसा हुआ कि प्रदेश प्रभारी मौजूद नहीं रहे। बता दें कि छत्तीसगढ़ के प्रभारी नितिन नबीन 20 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। अभी उनके पास छत्तीसगढ़ का प्रभार भी है। अब यह बताया जा रहा है कि इसी महीने राष्ट्रीय कार्यकारिणी तैयार हो जाएगी। संभावना है कि जून तक छत्तीसगढ़ को नया प्रभारी मिल जाए। कोर कमेटी में भी बड़ा बदलाव
छत्तीसगढ़ भाजपा की कोर कमेटी की मंगलवार को हुई बैठक में भी विवाद हुआ। कमेटी से पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह, बृजमोहन अग्रवाल और गौरीशंकर अग्रवाल को बाहर कर दिया गया। उनकी जगह कमेटी में ओपी चौधरी, विजय शर्मा, अमर अग्रवाल, लता उसेंडी, शिवरतन शर्मा को जगह दी गई है। पीएम का आवाहन नहीं आया काम डीजल-पेट्रोल संकट को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी के आवाहन पर सभी मंत्री अपने कारकेड से गाड़ियां कम कर रहे हैं। लेकिन वहीं भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हजारों गाड़ियां कार्यालय आईं। इसमें कुछ पदाधिकारी तो दो-तीन वाहनों को साथ लेकर आए। बैठक के दौरान कई लोगों ने इस मुद्दे को भी उठाया कि इस बैठक को वर्चुअल भी किया जा सकता था।
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