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छत्तीसगढ़ प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) भरत मटियारा का 17 मई को निधन हो गया। 63 वर्षीय मटियारा ने हैदराबाद के एक अस्पताल में उपचार के दौरान हृदय गति रुकने से अंतिम सांस ली। वे कांकेर जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ की राजनीति में सक्रिय रहे। इससे पहले, मटियारा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल के दौरान भी राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं दे चुके थे। उनका पार्थिव शरीर आज देर रात तक उनके गृहग्राम कांकेर पहुंचने की संभावना है। अंतिम संस्कार और विदाई कल की जाएगी। अब जानिए भरत मटियारा का राजनीतिक सफर भरत मटियारा का जन्म 8 मार्च 1964 को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ठेलकाबोड में हुआ था। उन्होंने बीए तक शिक्षा प्राप्त की है। उन्हें कृषि में विशेष रुचि रही है और वे राजनीति के साथ-साथ समाज सेवा से भी जुड़े रहे हैं। उनका जीवन सादा रहा और वे समाज के हर वर्ग से संपर्क में रहे। उन्होंने 1984 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ली। इसके बाद 1990 में भाजपा युवा मोर्चा के शहर अध्यक्ष बने। 1991 में वे सरस्वती शिक्षा समिति कांकेर के सदस्य रहे और उसी वर्ष ओडिशा के नवरंगपुर लोकसभा चुनाव में प्रचार कार्य में भी शामिल हुए। 1992 से 1999 तक वे अविभाजित मध्य प्रदेश में मांझी मोर्चा के युवा अध्यक्ष रहे। 1993 से 2007 तक उन्होंने बस्तर रोड टैक्सी ओनर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके अलावा वे कई सामाजिक पदों पर भी रहे, जैसे धीवर समाज के प्रदेश अध्यक्ष, पिछड़ा वर्ग समाज कांकेर जिला अध्यक्ष आदि। वे कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों में चुनाव अभिकर्ता के रूप में भी सक्रिय रहे और विभिन्न चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों के साथ काम किया। 2005 में वे भाजपा कांकेर जिला उपाध्यक्ष बने, 2009 में जिला महामंत्री और 2010 से 2016 तक जिला अध्यक्ष रहे। 2017 से 2019 तक वे छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) रहे। इसके अलावा उन्होंने बस्तर संभाग में पार्टी द्वारा दिए गए कई दायित्वों का सफल संचालन किया है। वे विभिन्न सामाजिक, खेल और सहकारी संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं।
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