बीमार बच्चे संग मां ने नदी किनारे किया घंटों इंतजार:कांकेर में कोटरी नदी पर पुल नहीं,ग्रामीण जान जोखिम में डाल इलाज के लिए मजबूर

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कांकेर के नक्सल प्रभावित छोटेबेठिया इलाके में पुल न होने के कारण बारिश के मौसम में अंदरूनी गांवों के ग्रामीणों को इलाज के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। कोयलीबेड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कंदाड़ी के आश्रित गांव खेरीपदर से ऐसी ही एक घटना सामने आई है, जहां एक मां को अपने बुखार से तपते बच्चे के साथ नदी किनारे घंटों डोंगी का इंतजार करना पड़ा। खेरीपदर निवासी रामलाल के परिजनों ने बताया कि उनके बच्चे को चार दिन से तेज बुखार था। छोटेबेठिया में जांच कराने पर उसमें मलेरिया की पुष्टि हुई। इलाज के बाद घर लौटते समय उन्हें नदी पार करने के लिए काफी देर तक डोंगी का इंतजार करना पड़ा। यह स्थिति आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती को दर्शाती है। इलाके में मलेरिया तेजी से फैल रहा है, और ग्रामीणों को इलाज के लिए उफनती नदी पार करने का जोखिम उठाना पड़ रहा है। कंदाड़ी पंचायत के खेरीपदर, आमाटोला, आलाबेड़ा, चोहिकोंडा, कलपर और हिंदूर सहित दर्जनों गांवों के मरीज प्रतिदिन इसी तरह नदी पार कर इलाज कराने को मजबूर हैं। ग्रामीण छोटेबेठिया के निजी चिकित्सकों और मेडिकल स्टोरों से महंगा इलाज कराने पर विवश हैं, जिसका आर्थिक बोझ कमजोर आदिवासी परिवारों पर पड़ रहा है। ग्राम पंचायत कंदाड़ी की सरपंच मैनी कचलम ने बताया कि कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने एक शिविर लगाया था। हालांकि, समय पर सूचना न मिलने के कारण अधिकांश ग्रामीण जांच नहीं करा पाए। उन्होंने पंचायत में दोबारा विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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