भास्कर न्यूज| रायगड़ा/भुवनेश्वर ओडिशा में पिछली बीजेडी सरकार के बेहतर स्वास्थ्य के दावों की पोल खुल गई है। राज्य की नोडल एजेंसी ओडिशा स्टेट मेडिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सरकारी अस्पतालों में दवाओं और उपकरणों की सप्लाई का जिम्मा संभालने वाली इस एजेंसी ने आदिवासी बहुल रायगड़ा जिले सहित पूरे राज्य में भारी लापरवाही बरती। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 692.97 करोड़ रुपये की दवाओं की मांग के मुकाबले महज 49.5% यानी 336.94 करोड़ की ही सप्लाई हो सकी। आंकड़ों के अनुसार 204 तरह की जरूरी दवाएं खरीदी ही नहीं गईं। ओपीडी की 555 दवाओं में से 141 दवाएं अस्पतालों में थीं ही नहीं। करीब 252 खरीद ऑर्डर लागू ही नहीं किए गए। रायगड़ा में 221 दवाओं की मांग थी, पर सप्लाई मात्र 45% हुई। जांच में सामने आया कि रायगड़ा में 14 दवाएं एक साल तक गायब रहीं। इनमें एम्पीसिलीन, एज़िथ्रोमाइसिन, मेटफॉर्मिन, पेंटोप्राजोल और विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स जैसी रोजमर्रा की और इमरजेंसी दवाएं शामिल थीं। मजबूरी में मरीजों को लोकल मार्केट से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ीं। इस मामले में बीएसपी के राज्य समन्वयक जितू जकाशिका कहना है कि, बीजेडी ने आदिवासियों की जान से खिलवाड़ किया, इसीलिए जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। वहीं ओडिशा स्वास्थ्य मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा का कहना है कि ओएसएमसीएल को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। आपूर्तिकर्ताओं को फायदा पहुंचाया गया लेकिन मरीजों को दवाएं नहीं मिलीं।
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