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बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स में इलाज और जांच के नाम पर अवैध वसूली का मामला सामने आया है। एक मरीज के परिजन ने एक्स-रे कराने के लिए कर्मचारी पर 600 रुपए की डिमांड करने का आरोप लगाया है। परिजन का आरोप है कि कर्मचारी ने कहा कि पैसे दोगे तो तुरंत एक्स-रे होगा। नहीं, तो लंबी तारीख मिलेगी। इसके साथ ही उसे दवा भी खरीदकर लाना पड़ेगा। इस मामले की शिकायत पर सिम्स के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि मरीजों के साथ अवैध वसूली सख्त अनुशासनहीनता है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कश्यप कॉलोनी निवासी अमर कश्यप का भाई अमन कश्यप बीमार है, जिसका इलाज कराने के लिए वह सिम्स लेकर आया था। यहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मरीज का एक्स-रे कराने के लिए कहा, इसके लिए उसे रेडियोलॉजी विभाग में भेजा गया। कर्मचारी ने एक्स-रे के लिए मांगे 600 रुपए अमन के भाई अमर कश्यप ने आरोप लगाया कि एक्स-रे विभाग के अमित नाम के कर्मचारी उससे 600 रुपए की मांग की। कर्मचारी ने उसे कहा कि अस्पताल में जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन पैसे देने पर वह तुरंत दवा की व्यवस्था कराकर एक्स-रे करा देगा। अमर कश्यप ने पैसे देने से इनकार कर किया, तब कर्मचारी का रवैया बदल गया। आरोप है कि उन्हें 13 मई की तारीख देकर एक्स-रे के लिए बुलाया गया। साथ ही कहा कि पहले बाहर से दवा खरीदकर लाओ, उसके बाद ही एक्स-रे किया जाएगा। परिजन बोले- गरीब मरीजों के साथ अन्याय, ऐसे कर्मचारी पर कार्रवाई हो इस घटना से नाराज परिजन ने अस्पताल अधीक्षक से लिखित शिकायत की है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में गरीब और जरूरतमंद लोग इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन यदि उनसे जांच और इलाज के नाम पर पैसों की मांग की जाए तो यह उनके अधिकारों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल में इस तरह खुलेआम वसूली होना बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही दोषी कर्मचारी पर कार्रवाई की जानी चाहिए। अधीक्षक बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई सिम्स के अस्पताल अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि मरीज के परिजन ने कर्मचारी पर अवैध वसूली करने की शिकायत की है। यह गंभीर मामला है। इस मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही संबंधित कर्मचारी के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अस्पताल परिसर में इलाज, जांच या दवा के बदले किसी भी तरह का लेन-देन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके लिए अस्पताल में सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों और परिजनों की शिकायतें सीधे दर्ज कराने के लिए अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए गए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति दबाव या डर के बिना शिकायत कर सके।
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