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Home » पोस्टमार्ट के लिए ऑटो से लाया बेटे का शव:जीपीएम में हॉस्पिटल ने वापसी के लिए भी नहीं दिया वाहन, बाहर लटका रहा शव
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पोस्टमार्ट के लिए ऑटो से लाया बेटे का शव:जीपीएम में हॉस्पिटल ने वापसी के लिए भी नहीं दिया वाहन, बाहर लटका रहा शव

By adminMay 14, 2026No Comments2 Mins Read
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले एक बेबस आदिवासी पिता को अपने 22 वर्षीय जवान बेटे के शव को सम्मानजनक विदाई तो दूर, पोस्टमार्टम के लिए ले जाने तक को सरकारी गाड़ी नसीब नहीं हुई। मजबूरी में पिता ने ऑटो किराए पर लिया और बेटे के शव को ऑटो के पायदान पर लिटाकर अस्पताल और फिर वापस घर तक का सफर तय किया। विशेषरा गांव के रहने वाले कमलेश गोंड लंबे समय से मानसिक बीमारी से पीड़ित थे। जागरूकता की कमी और सुदूर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के लिए माटी कछार गांव ले गए थे। इसी दौरान कमलेश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। संवेदनहीनता की हद न पुलिस ने सुध ली, न अस्पताल ने बेटे की मौत के बाद पिता ज्ञान सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल ले जाने की थी। प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह रहा कि गाड़ी के लिए भटकते रहे, घंटों इंतजार के बाद भी न पुलिस ने वाहन उपलब्ध कराया और न ही स्वास्थ्य विभाग ने। थक-हारकर पिता ने ₹2,000 में एक निजी ऑटो किराए पर लिया। ऑटो के भीतर जगह न होने के कारण शव को बाहर पायदान पर रखा गया और करीब 20 किलोमीटर का सफर तय किया गया। वापसी में भी वही बेबसी पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को उम्मीद थी कि अब शायद सरकारी ‘शव वाहन’ मिल जाए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की बेरुखी बरकरार रही। पिता को दोबारा उसी ऑटो के पायदान पर बेटे के शव को लादकर 15 किलोमीटर दूर अपने गांव वापस जाना पड़ा। रास्ते भर शव का एक हिस्सा बाहर लटका रहा, जिसे देखकर राहगीरों का कलेजा कांप गया। पीड़ित पिता का दर्द पिता ज्ञान सिंह गोंड ने बताया “बेटा बीमार था, इलाज की उम्मीद में ले गए थे पर उसने फांसी लगा ली। पुलिस कार्रवाई के लिए शव अस्पताल लाना था, लेकिन कोई गाड़ी नहीं मिली। मजबूरी में ऑटो के पायदान पर रखकर लाए। पोस्टमार्टम के बाद भी किसी ने मदद नहीं की।” ऑटो चालक की जुबानी ऑटो ड्राइवर महिपाल ने कहा “परिजन बहुत परेशान थे, उनके पास कोई साधन नहीं था। गाड़ी के अंदर जगह नहीं थी, इसलिए शव को पायदान पर सुरक्षित रखकर अस्पताल लाया और फिर वापस गांव छोड़ने गया।”



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