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भास्कर न्यूज | कवर्धा जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली ने 31 हजार बच्चों और उनके पालकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। बोर्ड की तर्ज पर 5वीं-8वीं की परीक्षा तो करा ली गई, लेकिन रिजल्ट के नाम पर विभाग सिर्फ फर्द (अस्थाई सूची) तक सिमट कर रह गया है। 13 दिन पहले जब परिणाम आए, तो विभाग ने ढिंढोरा पीटा की काम समय पर हो गया, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी बच्चों के पास अपनी कामयाबी का कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है। अंकसूची के अभाव में जिले के हजारों बच्चों का भविष्य अधर में है। निजी स्कूलों में दाखिला शुरू हो गया है, लेकिन विभाग की सुस्त प्रिंटिंग के कारण दाखिले की प्रक्रिया थमी हुई है। वहीं, पालकों का कहना है कि वर्तमान समय में जिले के निजी स्कूलों में एडमिशन शुरू हो गए है। टीसी के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं, तो उन्हें खाली हाथ लौटाया जा रहा है। स्कूलों का तर्क है कि जब तक मूल अंकसूची नहीं आएगी, टीसी जनरेट नहीं होगी। प्लानिंग फेल : जब 30 अप्रैल को परिणाम घोषित हुआ, तभी प्रिंटिंग की तैयारी क्यों नहीं किए? दावा खोखला : डीईओ ने 15 मई तक वितरण का लक्ष्य दिया था, जो अब कागजी साबित हो रहा है। प्रक्रिया में झोल : त्रुटि सुधार का काम जो रिजल्ट से पहले होना था, वह अब प्रिटिंग प्रेस भेजने के बहाने किया जा रहा है। बच्चों को प्रगति पत्रक दिए जिले के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 1 से 4 व 6, 7 वीं के बच्चों को प्रगति पत्रक 30 अप्रैल को दिया जा चुका है। सिर्फ 5 वीं व 8 वीं के बच्चों का अंकसूची शेष है। गौर करने की बात है कि इन दोनों कक्षा में लगभग एक हजार बच्चों को पूरक व अनुत्तीर्ण किया गया है। ऐसे बच्चों को फिर से परीक्षा दिलाना होगा। सुधार में वक्त लगा है: डीईओ डीईओ एफआर वर्मा ने बताया कि बच्चों की अंकसूची में गलती न हो, इसलिए प्रधान पाठकों को डेटा चेक करने का समय दिया गया था। अब डेटा फाइनल होकर प्रेस में जा चुका है। 20 मई तक जिले में मार्कशीट आ जाएंगी।
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