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भास्कर न्यूज| नर्रा शासन-प्रशासन अंतिम छोर के व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के दावे तो करते हैं लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कुछ और ही बयां करती है। इसका एक जीता-जागता उदाहरण जनपद पंचायत बागबाहरा के अंतिम छोर और ओडिशा सीमा से लगे ग्राम पंचायत परसुली के आश्रित ग्राम अमनपुरी में देखने को मिला है। यहां एक गरीब और बेबस परिवार आज भी एक पक्के मकान (प्रधानमंत्री आवास) के लिए तरस रहा है और जर्जर कच्चे खपरैल के मकान में जिंदगी काटने को मजबूर है। ग्राम अमनपुरी निवासी अमृत लाल सोनवानी पिछले कुछ सालों से गंभीर रूप से लकवा (पैरालिसिस) से पीड़ित हैं। बीमारी के कारण वे पूरी तरह विकलांग हो चुके हैं और बातचीत करने में भी असमर्थ हैं। इस विकट परिस्थिति में परिवार के भरण-पोषण और दो छोटे बच्चों की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी इन्द्रोतीन बाई सोनवानी के कंधों पर आ गई है। इन्द्रोतीन बाई रोज़ाना मेहनत और रोजी-मजदूरी करके जैसे-तैसे अपने बीमार पति का इलाज करवा रही हैं और बच्चों का पेट पाल रही हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस बेबस परिवार की सुध लेते हुए उन्हें तत्काल प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाए, ताकि वे सुरक्षित रह सकें। हैरानी की बात यह है कि जो परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ का सबसे पहला हकदार है, उसे अब तक इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। शासन की योजनाएं फाइलों में दम तोड़ रही हैं और वास्तविक जरूरतमंदों को दरकिनार किया जा रहा है। यह गरीब परिवार आज जिस कच्चे खपरैल के मकान में रह रहा है, उसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। आगामी मानसून (बरसात) सिर पर है, ऐसे में जर्जर मकान के कभी भी ढहने या किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। बेबस पत्नी को अब यही चिंता सता रही है कि तेज बारिश में वह अपने बीमार पति और बच्चों को लेकर कहां जाएगी। योजना के लाभ से वंचित है महिला
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