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गौरेला नगर पालिका ने थाना गौरेला आवासीय कॉलोनी का नल कनेक्शन काट दिया है। जल आपूर्ति शुल्क का भुगतान न होने के कारण यह कार्रवाई की गई है। भीषण गर्मी के बीच हुई इस कार्रवाई से कॉलोनी के निवासियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। कॉलोनी के निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे कनेक्शन काट दिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई से उनमें भारी आक्रोश है और पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नारायण साहू ने पालिका प्रशासन का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है, बल्कि लगभग चार महीने पहले ही थाना प्रभारी को बकाया जल शुल्क अदा करने के संबंध में पत्र जारी कर सूचित किया गया था। बकाया शुल्क नहीं चुकाने पर कटा नल कनेक्शन सीएमओ साहू ने कहा कि विभाग की ओर से शुल्क भुगतान पर ध्यान न दिए जाने के बाद नियमानुसार नल कनेक्शन काटने की कार्रवाई की गई है। वहीं दूसरी ओर, नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष मुकेश दुबे ने भीषण गर्मी के मौसम में आम लोगों के पानी का कनेक्शन काटे जाने को पूरी तरह से अनुचित और निंदनीय बताया। अध्यक्ष के अनुसार, भले ही कई महीनों से शुल्क का भुगतान नहीं किया गया था, लेकिन इस तपती गर्मी में मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखा जाना चाहिए था। बता दें कि गौरेला नगर पालिका क्षेत्र पहले से ही जलसंकट से जूझ रहा है। 30 दिन के बच्चे को मिले तीन प्रमाण पत्र पेंड्रा में सुशासन की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहां नवागांव में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर में महज 30 दिन के एक बच्चे को एक साथ तीन महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र सौंपे गए। इस शिविर का उद्देश्य शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना था। इसी दौरान नवागांव निवासी अश्विन कुमार कैवर्त अपने 30 दिन के बेटे आकर्ष के साथ शिविर में पहुंचे। शिविर में प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए नन्हे आकर्ष के नाम पर जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र कुछ ही समय में तैयार कर दिए। आमतौर पर इन दस्तावेजों को बनवाने के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन इस शिविर में यह प्रक्रिया बेहद सहज और त्वरित रही। जिला प्रशासन की टीम ने स्वयं अश्विन के परिवार को ये प्रमाण पत्र सौंपे। यह कदम न केवल रिकॉर्ड समय में दस्तावेज जारी करने का उदाहरण है, बल्कि यह जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और जनता के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। इसे वास्तविक सुशासन का एक उदाहरण माना जा रहा है, जहां प्रशासन जनता के द्वार तक पहुंच रहा है।
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