अंग्रेजों के जमाने के मालगुजार एवं दानवीर दाऊ कल्याण सिंह से संबंधित जमीनों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। राजस्व मंडल ने स्पष्ट किय …और पढ़ें

HighLights
- दाऊ कल्याण सिंह की जमीनों की खरीदी-बिक्री जारी
- राजस्व मंडल के आदेश के बावजूद ऐसा हो रहा है
- राजस्व मंडल ने स्पष्ट किया कि उनका कोई वारिस नहीं है
नईदुनिया न्यूज, भाटापारा। अंग्रेजों के जमाने के मालगुजार एवं दानवीर दाऊ कल्याण सिंह से संबंधित जमीनों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। राजस्व मंडल के चार दिसंबर 2020 के आदेश में दाऊ कल्याण सिंह एवं उनकी पत्नियों जनकनंदिनी और सरजाबती के निसंतान निधन के कारण उनकी सम्पत्ति को शासन की सम्पत्ति घोषित करते हुए भू-अभिलेख में छत्तीसगढ़ शासन का नाम दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बावजूद संबंधित जमीनों की खरीदी-बिक्री का मामला जनचर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, दाऊ कल्याण सिंह के निधन के बाद उनकी सम्पत्ति उनकी पत्नियों के नाम दर्ज थी। बाद में शासन ने इन सम्पत्तियों को शासकीय संपत्ति घोषित किया। इसके बावजूद दाऊ के आम मुख्तार के पुत्र स्वयं को वारिस बताकर जमीनों की बिक्री करते रहे। इस मामले में शिवकुमार एवं नितिन आहूजा द्वारा जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांच के लिए मामला राजस्व मंडल को भेजा था।
राजस्व मंडल ने स्पष्ट किया कि दाऊ कल्याण सिंह का कोई वैधानिक वारिस नहीं है, इसलिए उनकी सम्पत्ति राज्य शासन की मानी जाएगी और संबंधित भूमि की खरीदी-बिक्री अवैध होगी। तहसीलदार एवं राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी भू-अभिलेखों में छत्तीसगढ़ शासन का नाम दर्ज किया जाए। हालांकि, यह सवाल उठ रहा है कि कितने खसरा नंबरों में शासन का नाम दर्ज किया गया है और किन कारणों से ऐसा नहीं हो पाया।
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मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, फिर भी जमीनों की रजिस्ट्री और खरीदी-बिक्री जारी रहने पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। तहसीलदार यशवंत राज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण भू-अभिलेख में शासन का नाम नहीं दर्ज किया जा सका।
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