![]()
कोरबा जिले में हाथियों का उत्पात जारी है। गुरुवार रात धरमजयगढ़ वन मंडल से आए दो दंतैल हाथियों ने कुदमुरा रेंज के गीतकुंवारी गांव में किसानों की खड़ी धान की फसल को रौंद दिया। जिले में कुल 53 हाथी चार अलग-अलग झुंडों में घूम रहे हैं। कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज स्थित मेउड़ पहाड़ पर 48 हाथियों का एक बड़ा दल डेरा जमाए हुए है। यह झुंड मार्च से ही कटोरीमोती के पास कुकरीचकहर से मेउड़ पहाड़ पर सक्रिय है, जहां हाथियों के लिए भोजन और पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। वन विभाग के अनुसार गर्मी के मौसम में हाथियों का यह झुंड हर साल ढाई से तीन महीने तक जटगा रेंज में रहता है। 5 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले मेउड़ पहाड़ पर पर्याप्त भोजन और पानी की उपलब्धता के कारण हाथी यहां रुकते हैं। हालांकि, कभी-कभी वे पहाड़ से उतरकर गांवों की ओर आ जाते हैं। हाथियों ने धान की फसल को किया भारी नुकसान गीतकुंवारी गांव में घुसे दो दंतैल हाथियों ने कई एकड़ में लगी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। किसानों ने शोर मचाकर और मशाल जलाकर हाथियों को खदेड़ने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी फसल बर्बाद हो चुकी थी। ग्रामीणों ने बताया कि फसल कटाई के लिए तैयार थी, जिसे हाथियों ने पूरी तरह नष्ट कर दिया। हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत हाथियों की लगातार आवाजाही से कुदमुरा, जटगा और पसान क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं। रात होते ही लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं, जिससे खेतों की रखवाली करना मुश्किल हो गया है। वन विभाग की टीम गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क कर रही है और हाथी मित्र दल भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मुआवजा प्रक्रिया और ड्रोन से ट्रैकिंग जारी वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी दिखने पर तुरंत सूचना दें और अकेले उनके पास न जाएं या उन्हें परेशान न करें। विभाग फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा प्रकरण तैयार कर रहा है। इसके अतिरिक्त, मेउड़ पहाड़ पर मौजूद 48 हाथियों के दल पर ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है ताकि वे रिहायशी इलाकों में प्रवेश न कर सकें।
<
