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कोरबा प्रशासन ने बाल विवाहों की रोकथाम और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “सतर्कता दिवस” का आयोजन किया। इस पहल में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत 250 से अधिक संगठनों के नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ की सहयोगी संस्था होलिस्टिक एक्शन रिसर्च एंड डेवलपमेंट (हार्ड) ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कानून के अनुसार, शादी में सेवा देने वाले हलवाई, डेकोरेटर, बैंड-बाजा वाले, मैरिज हॉल संचालक और विवाह संपन्न कराने वाले पंडित-मौलवी भी अपराध में भागीदार माने जाते हैं, जिन पर सजा और जुर्माना हो सकता है। वही, जिले में लायंस क्लब इंटरनेशनल और नगर निगम ने संयुक्त रूप से “पर्यावरण सेवा सप्ताह” अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान 18 से 26 अप्रैल तक चलेगा, जिसका उद्देश्य शहरवासियों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। ‘सतर्कता दिवस’ का आयोजन जिले में बुधवार को बाल विवाह की रोकथाम के लिए सतर्कता दिवस का आयोजन किया। जिला प्रशासन के बाल विवाह निषेध अधिकारी और आशा यूनिट ने इस अभियान में पूरा सहयोग दिया। हार्ड संस्था ने पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूलों के शिक्षकों और धार्मिक गुरुओं के साथ मिलकर जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में “बाल विवाह मुक्त भारत” का संदेश पहुंचाया। ग्रामीणों को इस कुप्रथा को न अपनाने की शपथ भी दिलाई गई। अक्षय तृतीया को परंपरागत रूप से शुभ मुहूर्त माना जाता है, जिस दिन बड़ी संख्या में बाल विवाह होने की आशंका रहती है। इस बार सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों और जागरूकता अभियान के कारण जिले में इस दिन होने वाले बाल विवाहों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। बाल विवाद दंडनीय अपराध संस्था प्रमुख सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि कुछ साल पहले तक ग्रामीणों को यह जानकारी ही नहीं थी कि नाबालिग बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। पंडित-मौलवी, डेकोरेटर को भी हो सकती है सजा कानून के अनुसार शादी में सेवा देने वाले हलवाई, डेकोरेटर, बैंड-बाजा वाले, मैरिज हॉल संचालक और विवाह संपन्न कराने वाले पंडित-मौलवी भी अपराध में भागीदार माने जाते हैं, जिन पर सजा और जुर्माना हो सकता है। लोगों से की ये अपील उन्होंने यह भी बताया कि जमीनी स्तर पर निरंतर जागरूकता अभियान के चलते अब लोग ऐसी घटनाओं की सूचना तुरंत प्रशासन को देते हैं और प्रशासन त्वरित कार्रवाई करता है। सुशील कुमार ने विश्वास जताया कि शासन की ओर से निर्धारित 2030 तक कोरबा जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल कर लिया जाएगा। लायंस क्लब और नगर निगम ने जल संरक्षण अभियान शुरू किया कोरबा में लायंस क्लब इंटरनेशनल और नगर निगम कोरबा ने संयुक्त रूप से “पर्यावरण सेवा सप्ताह” अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान 18 से 26 अप्रैल तक चलेगा, जिसका उद्देश्य शहरवासियों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। अभियान के उद्घाटन के अवसर पर, नगर निगम के अधिकारियों और लायंस क्लब के पदाधिकारियों ने नागरिकों से जल संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि गर्मी के कारण भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में जल बचाने के लिए छोटे-छोटे बदलाव अपनाने होंगे। जल संरक्षण के लिए दिए गए व्यावहारिक सुझाव अभियान दल ने लोगों को जल बचाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए। इनमें नल को बेवजह खुला न छोड़ना, टंकी भरते ही मोटर बंद करना, सब्जियों और फलों को धोने के बाद बचे पानी का पौधों में उपयोग करना और कपड़े धोते समय बाल्टी का प्रयोग करना शामिल है। इसके अलावा घरों में टपकते नलों की मरम्मत और वर्षा जल संचयन को अपनाने पर भी जोर दिया गया। जागरूकता अभियान की गतिविधियां और कार्यक्रम इस सप्ताह के दौरान, लायंस क्लब के सदस्य अलग-अलग मोहल्लों, स्कूलों और बाजारों में पंपलेट वितरित करेंगे। वे नुक्कड़ नाटक और जनसंवाद के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे। नगर निगम की टीम भी जल संरक्षण के संदेश वाले पोस्टर और बैनर लगाएगी। अभियान का उद्देश्य और संभावित प्रभाव आयोजकों ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को अपनी आदतें बदलने के लिए प्रेरित करना है। उनका मानना है कि यदि प्रत्येक घर प्रतिदिन 20-30 लीटर पानी बचाता है, तो पूरे शहर में लाखों लीटर पानी की बचत संभव हो सकेगी।
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