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देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही सबसे बड़ी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 19 मई को बस्तर दौरे पर रहेंगे, जहां जगदलपुर में चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठक होगी। इस बैठक में बस्तर 2.0 का ब्लूप्रिंट फाइनल होने की संभावना जताई जा रही है जिसे केवल सुरक्षा समीक्षा नहीं, बल्कि “नक्सलवाद मुक्त भारत” के अगले चरण की नीति तय करने वाला बड़ा मंथन माना जा रहा है। इस बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के खात्म के बाद केंद्रीय गृहमंत्री का पहला बस्तर दौरा है। इस लिहाज से नक्सल उन्मूलन अभियान में हाल के वर्षों में मिली बड़ी सफलताओं के बाद पहली बार बस्तर में इस स्तर का सुरक्षा और राजनीतिक जमावड़ा होने जा रहा है। केंद्र सरकार की कोशिश है कि बस्तर को अब “रेड कॉरिडोर” की पहचान से बाहर निकालकर “डेवलपमेंट कॉरिडोर” के रूप में स्थापित किया जाए। यही वजह है कि बैठक में सुरक्षा रणनीति के साथ-साथ सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, मोबाइल नेटवर्क, रोजगार और आधारभूत ढांचे पर भी विस्तार से चर्चा होगी। सुरक्षा के साथ समानांतर विकास पर होगी बात बैठक का सबसे अहम एजेंडा 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करना माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय पिछले कुछ वर्षों से “सिक्योरिटी एंड डेवलपमेंट इन पैरलल” मॉडल पर काम कर रहा है। अब इसी रणनीति को अंतिम चरण में ले जाने की तैयारी है। बैठक में राज्यों के बीच बेहतर सुरक्षा समन्वय, सीमावर्ती जिलों में खुफिया साझेदारी, संयुक्त ऑपरेशन और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने पर फोकस रहेगा। ड्रोन सर्विलांस, रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और सड़क नेटवर्क विस्तार जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे। इन मुद्दों पर होगा बड़ा मंथन
2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन का एक्शन प्लान
सीमावर्ती जिलों में संयुक्त सुरक्षा रणनीति
इंटर-स्टेट इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम
सड़क और सुरक्षा कैंप नेटवर्क विस्तार
आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और रोजगार मॉडल
स्वास्थ्य और मोबाइल कनेक्टिविटी की समीक्षा
ड्रोन और हाईटेक निगरानी व्यवस्था
केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तंत्र
विकास परियोजनाओं का भी कर सकते हैं निरीक्षण बस्तर बनेगा नई आंतरिक सुरक्षा नीति का मॉडल
बस्तर में होने वाली यह बैठक आने वाले समय में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। यदि सुरक्षा और विकास की संयुक्त रणनीति सफल रहती है, तो बस्तर मॉडल को देश के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी लागू किया जा सकता है। केंद्र सरकार के लिए यह बैठक केवल समीक्षा नहीं, बल्कि संघर्ष से स्थिरता की राष्ट्रीय कहानी लिखने का प्रयास भी मानी जा रही है। बड़ा राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिने जाने वाले बस्तर में केंद्रीय गृहमंत्री और चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है। यह एक बड़ा राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश भी होगा। केंद्र सरकार यह संकेत देना चाहती है कि जिन इलाकों में कभी नक्सली प्रभाव सबसे ज्यादा था, वहां अब शासन, विकास और निवेश की नई संरचना तैयार की जा रही है।
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