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Home » एससी-एसटी एक्ट में अपराध साबित करने के लिए वैध जाति प्रमाणपत्र जरूरी : हाई कोर्ट
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एससी-एसटी एक्ट में अपराध साबित करने के लिए वैध जाति प्रमाणपत्र जरूरी : हाई कोर्ट

By adminApril 24, 2026No Comments2 Mins Read
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23 04 2026 sc st act high court 2026423 112835
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हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध साबित करने के लिए पीड़ित का वैध जाति प्रमाणपत्र ह …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 23 Apr 2026 11:28:09 AM (IST)Updated Date: Thu, 23 Apr 2026 11:30:19 AM (IST)

एससी-एसटी एक्ट में अपराध साबित करने के लिए वैध जाति प्रमाणपत्र जरूरी : हाई कोर्ट

HighLights

  1. ट्रायल कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से रद किया
  2. जुर्माने की राशि 500 रुपये से बढ़ाकर दो हजार की
  3. मौखिक दावे पर्याप्त नहीं, ठोस व विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी

नई दुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध साबित करने के लिए पीड़ित का वैध जाति प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है।

जस्टिस एनके व्यास की एकलपीठ ने 21 साल पुराने मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से रद करते हुए छह महीने की सजा समाप्त कर दी, जबकि जुर्माने की राशि 500 रुपये से बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दी।

राशि प्रत्येक याचिकाकर्ता को जमा करनी होगी

यह राशि प्रत्येक याचिकाकर्ता को जमा करनी होगी। मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि सरकारी जमीन पर दुकान निर्माण को लेकर हुए विवाद के दौरान आरोपितों ने जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।

पुलिस ने आइपीसी की धाराओं 294, 323, 506/34 और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर) के तहत मामला दर्ज कर चालान पेश किया। सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपितों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।

यह भी पढ़ें- मेडिकल रिपोर्ट निगेटिव फिर भी सजा… पीड़ित बच्ची की गवाही पर दुष्कर्म केस में CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

आरोपितों ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी

आरोपितों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि शिकायतकर्ता का जाति प्रमाणपत्र केवल तहसीलदार द्वारा जारी अस्थायी प्रमाणपत्र था, जो सक्षम प्राधिकारी का नहीं था। इसलिए इसे वैध नहीं माना जा सकता।

केवल मौखिक दावे पर्याप्त नहीं, ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी

कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि केवल मौखिक दावे पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक है। कोर्ट ने वैध जाति प्रमाणपत्र के अभाव में धारा 3(1)(आर) के तहत अपराध सिद्ध नहीं माना।



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