यह मामला वर्ष 2017 और 2018 में छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे चर्चित विवाद बना था। तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी कथित अश्लील सीडी के प्रसार को लेक …और पढ़ें

HighLights
- यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे चर्चित विवाद बना था।
- एक शिकायत में भयादोहन और धन उगाही का आरोप भी लगाया गया था।
- दूसरी एफआईआर भाजपा कार्यकर्ता प्रकाश बजाज की शिकायत पर हुई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पूर्व मंत्री राजेश मूणत से जुड़े बहुचर्चित फर्जी सेक्स सीडी मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा ने रायपुर सत्र न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ आपराधिक अभियोग तय किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
यह मामला वर्ष 2017 और 2018 में छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे चर्चित विवाद बना था। तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत से जुड़ी कथित अश्लील सीडी के प्रसार को लेकर राज्य पुलिस ने कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और विनोद वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
एक शिकायत में भयादोहन और धन उगाही का आरोप लगाया गया था, जबकि दूसरी एफआईआर भाजपा कार्यकर्ता प्रकाश बजाज की शिकायत पर आइटी एक्ट के तहत दर्ज हुई थी।
पहली एफआईआर के बाद 26-27 अक्टूबर 2017 की रात गाजियाबाद स्थित विनोद वर्मा के घर पर पुलिस ने छापा मारकर उन्हें गिरफ्तार किया था। इसके विरोध में अगले दिन भूपेश बघेल ने प्रेस कांफ्रेंस कर कथित सीडी पत्रकारों के बीच वितरित की थी। बाद में दोनों मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
साबित नहीं, फिर भी सभी मामलों को जोड़ दाखिल किया आरोप-पत्र
सीबीआई तय समय में चालान पेश नहीं कर सकी थी, जिसके चलते विनोद वर्मा को 63 दिन बाद दिसंबर 2017 में जमानत मिली। अक्टूबर 2018 में दायर चालान में विनोद वर्मा और भूपेश बघेल के अलावा भाजपा से जुड़े कैलाश मुरारका, विजय पांडे और कारोबारी विजय भाटिया को भी आरोपित बनाया गया था। सीबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में माना था कि प्रकाश बजाज की शिकायत में लगाए गए कई आरोप साबित नहीं हुए, लेकिन रायपुर में सीडी वितरण को आधार बनाकर सभी मामलों को जोड़ते हुए आरोप पत्र दाखिल किया गया।
हाई कोर्ट में रखे गए ये तर्क
हाई कोर्ट में विनोद वर्मा की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और श्रेया गुप्ता ने दलील दी कि जिस शिकायत के आधार पर छापा मारा गया, वह खुद झूठी साबित हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि कथित सीडी मुंबई में भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा तैयार कराई गई थी और इसकी जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के ओएसडी अरुण बिसेन को भी थी। ऐसे में विनोद वर्मा पर फर्जी सीडी बनाने या अश्लील सामग्री प्रसारित करने का आरोप नहीं बनता।
निचली अदालत ने खारिज किए थे तर्क
रायपुर की निचली अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा था कि आपराधिक षड्यंत्र की कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ी हैं, इसलिए सभी आरोपितों की भूमिका जांच के दायरे में आती है। उल्लेखनीय है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पहले भूपेश बघेल को आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन सत्र न्यायालय ने उस फैसले को पलटते हुए उनके खिलाफ भी अभियोग तय कर दिए थे।
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