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छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के खरेंगा गांव में श्मशान घाट से मानव कंकाल मिलने के मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है। अवैध रेत खनन के दौरान कब्रें खोदकर मानव अवशेष बाहर आने की घटना को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध खनन इस कदर बेलगाम हो चुका है कि अब कब्र में दफन शव भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि प्रदेश में रेत माफियाओं को खुली छूट मिली हुई है। सरकार खनिज संसाधनों की सुरक्षा करने के बजाय कमीशनखोरी में व्यस्त है। भगवान भी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को माफ नहीं करेगा। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के संरक्षण में काम चल रहा है। नेता और अफसर भ्रष्टाचार करने में मशगूल है। उत्खनन में 10 कंकाल बाहर आ गए थे दरअसल, धमतरी जिले के खरेंगा गांव स्थित श्मशान घाट में अवैध रेत उत्खनन के दौरान 6 से 7 फीट गहरी कब्रें खोद दी गईं, जिससे करीब 10 मानव कंकाल बाहर आ गए। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने कंकालों को दोबारा दफना तो दिया, लेकिन अब यह पता नहीं है कि किसके परिजन के अवशेष कहां दफन किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना सामने आने के बाद भी रेत माफियाओं की गतिविधियां नहीं रुकीं। कंकाल मिलने की रात भी अवैध खनन जारी रहा। इससे लोगों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ गई है। गांव के बुजुर्गों और महिलाओं ने कहा कि अब उन्हें मौत के बाद भी सम्मान मिलने की उम्मीद नहीं रह गई है। श्मशान घाट में उत्खनन प्रशासनिक विफलता: कांग्रेस कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि श्मशान घाट जैसी संवेदनशील जगहों पर भी अवैध खनन नहीं रुक रहा, तो यह प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने मामले की न्यायिक जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। घटना के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, वहीं ग्रामीण लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह मामला अब अवैध खनन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। गांव के लड़कों को मजदूर बना रहे माफिया ग्राम व्यवस्था समिति के सचिव तामेश्वर साहू का आरोप है कि, अवैध खनन करने वाले लोग गांव के युवाओं का इस्तेमाल करते हैं। “17-18 साल के लड़कों को पहले मजदूरी पर रखते हैं। बाद में उन्हीं से ट्रैक्टर चलवाते हैं। कई के पास लाइसेंस भी नहीं होता।” तामेश्वर कहते हैं कि इससे गांव के लोगों के लिए विरोध करना मुश्किल हो जाता है। “सामने अपना ही गांव का लड़का दिखाई देता है, इसलिए लोग झगड़ा नहीं करना चाहते। असली लोग पीछे रहते हैं।” वे बताते हैं कि कई बार शिकायतें की गईं। प्रशासन आता है, कार्रवाई का भरोसा देता है और एक-दो दिन खनन रुक जाता है। लेकिन उसके बाद फिर रात में ट्रैक्टर चलने लगते हैं। शिकायतें हुईं, लेकिन खनन नहीं रुका ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब अवैध खनन की शिकायत हुई हो। गांव की सरपंच नीलम साहू बताती हैं कि पंचायत और ग्राम विकास समिति कई बार बैठक कर चुकी है। मुनादी कराई गई थी कि श्मशान घाट में रेत खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। सूचना देने वाले को 2 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा भी की गई थी। लेकिन इसके बावजूद खनन जारी रहा। हैरानी की बात यह है कि 10 कंकाल निकलने के बाद भी उसी रात फिर रेत निकाली गई। आज भी दूसरे रास्ते से गाड़ियां निकाली गई हैं। 5 ट्रैक्टर जब्त, माइनिंग इंस्पेक्टर को नोटिस धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि, मामले में 5 ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं। संबंधित क्षेत्र के माइनिंग इंस्पेक्टर को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने कहा कि जिस जगह रेत भंडारण की अनुमति दी गई थी, उसे भी निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि एनजीटी के आदेश के मुताबिक 15 जून तक सभी रेत खदानों को बंद किया जाना है। अविनाश मिश्रा के मुताबिक जिन क्षेत्रों में खनन की अनुमति है, वहां दोबारा सीमांकन कराया जाएगा। साथ ही अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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