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स्कूल शिक्षा विभाग की हालिया विज्ञप्ति के बाद शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिपूर्ति राशि शासकीय विद्यालय में प्रति विद्यार्थी होने वाले खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस (दोनों में से जो कम हो), उसी आधार पर तय की जाएगी। दरअसल, शिक्षा के अधिकार कानून के प्रावधानों के अनुसार निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों की फीस सरकार की ओर से प्रतिपूर्ति के रूप में दी जाती है। यह राशि दो मानकों पर तय होती है। पहला सरकारी स्कूल में प्रति छात्र खर्च और दूसरा निजी स्कूल की वास्तविक फीस। इनमें से जो कम हो, वही प्रतिपूर्ति राशि बनती है। उदाहरण से समझिए सरकारी स्कूल में प्रति छात्र खर्च ₹8,000 आता है। और निजी स्कूल की फीस ₹12,000 है। यहां ₹8,000 कम है, इसलिए निजी स्कूल को ₹8,000 ही प्रतिपूर्ति मिलेगी। इन केस सरकारी स्कूल में खर्च ₹10,000 है और निजी स्कूल की फीस ₹6,000 है। यहां ₹6,000 कम है, इसलिए निजी स्कूल को ₹6,000 ही मिलेगा। प्रति छात्र वास्तविक खर्च सार्वजनिक करने की मांग निजी स्कूलों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार को प्रति छात्र वास्तविक खर्च सार्वजनिक करना चाहिए। आशंका जताई जा रही है कि सख्त वित्तीय नियंत्रण के कारण यह खर्च घटकर ₹4000 या उससे भी कम हो सकता है अगर ऐसा है, तो उसी आधार पर नई प्रतिपूर्ति राशि तय होनी चाहिए। प्रदेश के निजी स्कूलों ने संकेत दिए हैं कि वे विभाग की ओर से तय किए गए नियम सरकारी खर्च या वास्तविक फीस में जो कम हो के आधार पर ही प्रतिपूर्ति स्वीकार करेंगे। 14 साल से नहीं बदली दर अभी कक्षा 1 से 5 तक ₹7000 प्रति छात्र/वर्ष और कक्षा 6 से 8 तक ₹11,400 प्रति छात्र/वर्ष प्रतिपूर्ति राशि बनती है। यह दरें 2011 से अब तक लागू हैं, जबकि प्राइवेट स्कूलों का कहना है कि इस दौरान महंगाई और वेतन में कई गुना वृद्धि हो चुकी है। वेतन बढ़ा 3-4 गुना, पर प्रतिपूर्ति जस की तस प्राइवेट स्कूल एसोसिशन ने तर्क देते हुए कहा है कि पिछले 14 वर्षों में सरकारी वेतन में भारी वृद्धि हुई है। विधायकों का वेतन ₹45,000 से बढ़कर ₹1,60,000 हो गया। IAS (एंट्री लेवल) ₹45,000 से बढ़कर ₹1,06,500 से अधिक हो गया है। इसी तरह राज्य कर्मचारियों का वेतन ₹42,000 से ₹1,08,600 तक बढ़ गया है। यानी वेतन 3 से 4 गुना बढ़ा, लेकिन RTE प्रतिपूर्ति राशि नहीं बढ़ी।
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