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जनजातीय गौरव भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर सत्यनारायण अग्रवाल शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, कोहका-नेवरा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर छात्रों ने रंगोली, चित्रकला और जनजातीय संस्कृति से जुड़ी नृत्य प्रस्तुतियां दीं। मुख्य वक्ता डॉ. निशा नेताम, सहायक प्राध्यापक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर ने भगवान बिरसा मुंडा के जनजातीय गौरव और प्रकृति के गहरे संबंध को बताया। उन्होंने कहा कि महिला समानता जनजातीय समाज की महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसे बनाए रखना और बढ़ावा देना चाहिए।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एमएल वर्मा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा सिर्फ आदिवासी नेता नहीं थे। वे भारत के स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक थे। उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज ने सामाजिक समरसता और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। उन्होंने जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के बीच संबंध की भी महत्ता बताई।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. संध्या लांजेवार ने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा “धरती आबा” के नाम से भी प्रसिद्ध हैं और वे सामाजिक समानता और संघर्ष के प्रतीक थे। संचालन डॉ. बरखा नाग ने किया। आयोजन को सफल बनाने में दिनेश बंजारे और महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र-छात्राओं ने सक्रिय योगदान दिया। छात्रों की रंगोली, चित्रकला और नृत्य प्रस्तुतियों ने जयंती के अवसर को और यादगार बनाया। कार्यक्रम में आए सभी अतिथि और स्थानीय जनजातीय समुदाय ने इसे उत्साहपूर्वक सराहा।
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