एकीकृत खेती मॉडल से हरसिंह ओयामी ने बनाई 7 लाख की सालाना आय
जैविक खेती, फसल विविधता, पशुपालन और मछली पालन को एक साथ जोड़कर कृषि को कैसे एक बेहद मुनाफेदार व्यवसाय बनाया जा सकता है, दंतेवाड़ा में 57 साल के किसान हरसिंह ओयामी इसकी मिसाल पेश कर रहे हैं। सालों से अपने परिवार के साथ पारंपरिक खेती कर रहे हरसिंह ने आधुनिक नवाचार अपनाए हैं। उन्होंने एकीकृत कृषि मॉडल विकसित किया है। इस अनूठी तकनीक और स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से आज वे सालाना तकरीबन 7 लाख रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
उनकी कुल कमाई में सबसे बड़ा योगदान जैविक सब्जियों के उत्पादन और विक्रय का है। हरसिंह ने अपने खेत में बनी डबरी में मछलियों की विभिन्न उन्नत प्रजातियों का पालन शुरू किया। इससे उन्हें हर साल लगभग 1 लाख रुपए की अतिरिक्त शुद्ध कमाई हो रही है।
उनके फार्म मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मछली पालन वाली डबरी का पानी पोषक तत्वों से समृद्ध होता है। इस पानी को वे पंप कर सीधे अपने खेतों में डालते हैं। इस डबरी के पानी का उपयोग जैविक सब्जियों, धान की विविध किस्मों और दलहन की फसलों में किया जाता है। इससे फसलों को प्राकृतिक एनपीके तत्व मिलते हैं और रासायनिक खाद-कीटनाशकों का खर्च पूरी तरह बच जाता है।
केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने सीजनल जैविक सब्जियां, दालें और धान की पारंपरिक प्रजातियों का उत्पादन किया है। इससे उन्होंने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। रासायनिक खाद, यूरिया और महंगे कीटनाशकों से दूरी बनाने के कारण उनकी प्रति एकड़ उत्पादन लागत नाममात्र रह गई है, जिससे सीधा मुनाफा बढ़ गया है।
57 वर्ष की उम्र में हरसिंह ने स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग और मेहनत से यह मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल आसपास के ग्रामीण इलाकों के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती छोड़कर इस बहुआयामी मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
हरसिंह ओयामी का खेत आज पूरे जिले के किसानों के लिए एक आदर्श मॉडल बन चुका है। उन्होंने साबित कर दिखाया है कि खेती में उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग किया जाए तो लागत में भारी कमी लाई जा सकती है और आजीविका को टिकाऊ व मजबूत बनाया जा सकता है।
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