छत्तीसगढ़

बालोद के पथराटोला में 5 करोड़ की लागत से बनेगा साइंस सेंटर एंड एक्सपीरियंस डेस्टिनेशन, दुर्ग संभाग का पहला विज्ञान केंद्र

किताबों में विज्ञान पढ़ने वाले बालोद के विद्यार्थियों को अब विज्ञान को देखने, छूने, प्रयोग करने और अनुभव करने का मौका मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विज्ञान, नवाचार और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में डौंडी ब्लॉक के पथराटोला में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से साइंस सेंटर एंड एक्सपीरियंस डेस्टिनेशन विकसित किया जा रहा है।

केंद्र को इंटरैक्टिव लर्निंग प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार करने की योजना है, जहां विद्यार्थी वैज्ञानिक सिद्धांतों को केवल पढ़ेंगे नहीं, बल्कि प्रयोग और तकनीक के माध्यम से उन्हें समझ सकेंगे। जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी के अनुसार साइंस सेंटर का टेंडर हो चुका है। आगामी 8 से 10 दिनों में वर्क ऑर्डर जारी होने की संभावना है। निर्माण की समय-सीमा छह माह रखी गई है। ऐसे में मार्च 2027 तक साइंस सेंटर तैयार होने का अनुमान है। उनके अनुसार यह दुर्ग संभाग का पहला विज्ञान केंद्र होगा। वहीं दंतेवाड़ा और रायपुर के बाद यह छत्तीसगढ़ का तीसरा विज्ञान केंद्र होगा।

प्रस्तावित साइंस सेंटर में विज्ञान और तकनीक के अलग-अलग आयामों को समझाने के लिए नौ इंटरैक्टिव जोन विकसित किए जाएंगे। इनमें प्लेनेटेरियम, स्पेस एक्सप्लोरेशन गैलरी, एआई एवं रोबोटिक्स स्टूडियो, एसटीईएम डिस्कवरी पार्क, ह्यूमन एनाटॉमी गैलरी, आपदा जागरूकता अनुभव क्षेत्र, इमर्सिव हेरिटेज जोन, टाइम एंड हिस्ट्री थिएटर और खगोल विज्ञान डिस्कवरी जोन शामिल हैं।

प्लेनेटेरियम में बच्चे ब्रह्मांड, तारों और अंतरिक्ष अभियानों को इमर्सिव तकनीक के जरिए समझ सकेंगे। स्पेस एक्सप्लोरेशन गैलरी में इसरो की उपलब्धियों के साथ चंद्रयान, मंगलयान और गगनयान जैसे अभियानों की जानकारी प्रदर्शित करने की योजना है। एआई एवं रोबोटिक्स स्टूडियो में विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटर विजन और रोबोटिक्स की शुरुआती समझ दी जाएगी।

साइंस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत अनुभव आधारित शिक्षा होगी। विद्यार्थी किसी वैज्ञानिक सिद्धांत को केवल किताब में पढ़ने के बजाय इंटरैक्टिव मॉडल और गतिविधियों के माध्यम से स्वयं समझ सकेंगे। ‘प्रवेश करो, खोजो, इंटरैक्ट करो, अनुभव करो, समझो और याद रखो’ की अवधारणा के आधार पर केंद्र को विकसित करने की योजना है। एसटीईएम डिस्कवरी पार्क में भौतिकी, गणित, जीव विज्ञान और इंजीनियरिंग से जुड़े सिद्धांतों को प्रयोगात्मक गतिविधियों के जरिए समझाया जाएगा। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और प्रयोग करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने का प्रयास होगा।

साइंस सेंटर में विज्ञान के साथ व्यवहारिक जीवन से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है। बाढ़, भूकंप, आग और रासायनिक आपात स्थितियों पर आधारित सिमुलेशन के जरिए बच्चों और आगंतुकों को आपदा प्रबंधन एवं सामुदायिक सुरक्षा की जानकारी देने की योजना है।

केंद्र को केवल स्थायी प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रखने की योजना है। यहां स्कूल विजिट, लाइव साइंस डेमो, एआई वर्कशॉप, एसटीईएम प्रतियोगिताएं, शिक्षक प्रशिक्षण और मौसमी प्रदर्शनियां आयोजित की जा सकेंगी। इससे विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और युवाओं के लिए भी यह लगातार सक्रिय शैक्षणिक मंच बन सकेगा।

साइंस सेंटर बनने के बाद जिले के विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जुड़ी गतिविधियों के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी। आसपास के जिलों के विद्यार्थी और शैक्षणिक संस्थान भी यहां शैक्षणिक भ्रमण के लिए आ सकेंगे। हालांकि केंद्र की वास्तविक सफलता निर्माण के बाद उसके नियमित संचालन, रखरखाव, प्रदर्शनों की गुणवत्ता और लगातार शैक्षणिक गतिविधियों पर निर्भर करेगी।

“साइंस सेंटर का उद्देश्य बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग और अनुभव के माध्यम से विज्ञान से जोड़ना है। एआई, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान और एसटीईएम जैसे क्षेत्रों से जुड़े इंटरैक्टिव माध्यम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा विकसित करने में सहायक होंगे।” सुनील चंद्रवंशी, सीईओ, जिला पंचायत बालोद

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