छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन का ट्रेंड तेज, 2025 में 4.05 करोड़ यात्राएं दर्ज; राजिम-डोंगरगढ़ की हिस्सेदारी 48.4%


छत्तीसगढ़ में पर्यटन का ट्रेंड तेजी से धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ रहा है। 2025 में प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर 4.05 करोड़ यात्राएं दर्ज की गई। इनमें अकेले राजिम और डोंगरगढ़ की हिस्सेदारी 1.96 करोड़ यानी 48.4% रही। यानी प्रदेश में दर्ज लगभग हर दूसरी पर्यटन यात्रा इन दोनों धार्मिक स्थलों की रही।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर 3.15 करोड़ यात्राएं दर्ज हुई थीं। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 4.05 करोड़ हो गया। यानी महज एक साल में 90 लाख या 28.6% की वृद्धि हुई। उपलब्ध पिछले सात वर्षों के आंकड़ों में यह सबसे बड़ी वार्षिक संख्या है।
राजिम और डोंगरगढ़ में सबसे ज्यादा फुटफॉल दर्ज किया गया। 2024 में राजिम में 78 लाख यात्राएं हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 1.12 करोड़ हो गई। यानी एक साल में 34 लाख की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
नए धार्मिक केंद्र भी बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 2025 में कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, शिवरीनारायण, गिरौदपुरी धाम, कुदरगढ़ और चंद्रहासिनी मंदिर चंद्रपुर को पर्यटन केंद्रों की सूची में शामिल किया। पहले ही साल इन पांच जगहों पर 95 लाख से ज्यादा यात्राएं दर्ज की गईं।
टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों का अनुमान है कि 2026 में इन पांच केंद्रों का आंकड़ा एक करोड़ के पार जा सकता है। बढ़ते फुटफॉल को देखते हुए यहां पर्यटक सुविधाओं के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है।
कौशल्या धाम में बने कॉटेज को लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू की गई है और इसके लिए जल्द टेंडर जारी करने की तैयारी है। दूसरे धार्मिक केंद्रों पर भी सुविधाएं और बुनियादी ढांचा बढ़ाने की योजना है।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के एमडी सौमिल रंजन चौबे ने कहा, “छत्तीसगढ़ में अब अनुभव आधारित पर्यटन, होमस्टे, राम वन गमन परिपथ, जनजातीय व ईको टूरिज्म, बुनियादी ढांचे और पीपीपी के जरिए नए निजी निवेश पर काम कर रहे हैं। लक्ष्य पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाने व उनका खर्च भी बढ़ाना है।”




