राजनीति

नगरीय निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस में सियासी हलचल, जोगी कांग्रेस के विलय पर मंथन

रायपुर। आगामी अक्टूबर-नवंबर में होने वाले 15 नगरीय निकाय चुनावों के मद्देनजर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान बगावत करने वाले 36 नेताओं की घर वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का विरोधी खेमा भी शामिल है।

इसी बीच, राज्य के पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी की पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के कांग्रेस में विलय को लेकर सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी की नेता व पूर्व विधायक डॉ. रेणु जोगी और अमित जोगी ने पार्टी के विलय के लिए आवेदन दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन के भीतर एक बड़ा धड़ा जोगी कांग्रेस की वापसी के पक्ष में है। यही कारण है कि भूपेश बघेल के तमाम विरोध के बावजूद इस प्रस्ताव पर सहमति बनाने की अंदरूनी कोशिशें चल रही हैं। यदि जोगी कांग्रेस का विलय संभव हुआ तो पार्टी के भीतर भूपेश की कमजोर होती पकड़ के दावों को बल मिल जाएगा। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर पार्टी हाईकमान ही लगाएगा।

उल्लेखनीय है कि अमित जोगी ने 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसके साथ ही, टीएस सिंहदेव के धुर विरोधी माने जाने वाले पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने भी कांग्रेस में वापसी के लिए आवेदन दिया है। कुछ भाजपा के बागी नेताओं के भी कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा है। बता दें कि विधानसभा चुनाव 2018 में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के पांच विधायक चुनाव जीते थे, हालांकि उस समय कांग्रेस सत्ता में आई थी।

अब नजरें 27 सितंबर को छत्तीसगढ़ के नवनियुक्त प्रभारी सुखदेव भगत के रायपुर दौरे पर टिकी हैं। उनके दौरे के दौरान प्रदेश पदाधिकारियों के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में जोगी कांग्रेस के विलय पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि जोगी कांग्रेस का हाथ कांग्रेस के साथ जुड़ेगा या नहीं। सुखदेव भगत को इसी महीने छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।

जोगी कांग्रेस की ओर से पार्टी के विलय और डॉ. रेणु जोगी व प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी सहित अन्य पदाधिकारियों की वापसी का प्रस्ताव काफी समय से अनुशासन समिति के समक्ष लंबित था। बीते शुक्रवार को हुई बैठक में निष्कासित नेताओं और कार्यकर्ताओं की वापसी से जुड़े 36 आवेदन रखे गए, जिनमें से कुछ को मंजूरी मिली जबकि 15-16 आवेदन निरस्त कर दिए गए।

कांग्रेस अनुशासन समिति अब पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी और गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इंटरनेट मीडिया पोस्ट, समाचार चैनलों, अखबारों के बयानों और सार्वजनिक मंचों से पार्टी नीतियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों की मानिटरिंग की जाएगी। चुनाव के समय पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों या संगठन के फैसलों के खिलाफ काम करने वालों पर विशेष नजर रखी जाएगी।

कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने स्पष्ट किया है कि जोगी कांग्रेस का मामला सीधे तौर पर पार्टी के विलय से जुड़ा है, इसलिए इस पर नए प्रदेश प्रभारी के साथ विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।

जोगी पार्टी के विलय की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसे डूबते को तिनके का सहारा होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button